नई दिल्ली, 17 अप्रैल (अशोक “अश्क) केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी हलचल सामने आई है। लंबे समय से जिस खुशखबरी का इंतजार था, अब वह हकीकत के करीब नजर आ रही है। नेशनल काउंसिल ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपते हुए न्यूनतम बेसिक वेतन को बढ़ाकर ₹69,000 करने की मांग रख दी है।इस प्रस्ताव में फिटमेंट फैक्टर को 3.83 करने और 25 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी में जोड़ने की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की भी सिफारिश की गई है।

14 अप्रैल को यह मांग औपचारिक रूप से 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी गई, जिससे कर्मचारियों में उत्साह का माहौल बन गया है। गौरतलब है कि 7वां वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिससे न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर करीब 17,990 रुपये किया गया था। ऐसे में नए प्रस्ताव को लागू किया गया तो यह वेतन संरचना में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि परिवार से जुड़े कई अहम मुद्दों को भी इस बार प्रस्ताव में शामिल किया गया है।

कंसल्टेटिव मशीनरी ने पे मैट्रिक्स को तर्कसंगत बनाने के साथ-साथ पितृत्व अवकाश, सरोगेसी के लिए अलग प्रावधान और 5 सदस्यीय परिवार यूनिट जैसी सुविधाओं की भी मांग उठाई है। मेमोरेंडम में यह भी कहा गया है कि बढ़ा हुआ वेतन सरकार पर बोझ नहीं बल्कि निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे उपभोग और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। केंद्र सरकार पहले ही 8वां वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है और विभिन्न पक्षों से सुझाव लिए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि आयोग अपनी रिपोर्ट अगले 18 महीनों में सौंप सकता है।

यदि ये प्रस्ताव स्वीकार होते हैं तो न केवल कर्मचारियों की सैलरी में भारी इजाफा होगा, बल्कि पेंशनधारकों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला देश के करोड़ों परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है।
















