नई दिल्ली, 18 अप्रैल (अशोक “अश्क”) भारत और रूस के बीच एक ऐतिहासिक सैन्य समझौता हुआ है, जिसके तहत दोनों देशों के सैनिकों, विमानों और युद्धपोतों की आपसी तैनाती पर सहमति बनी है। इस समझौते के तहत भारत और रूस अपने-अपने देशों में एक-दूसरे के 3000 सैनिकों को तैनात करने, 10 लड़ाकू विमानों और 5 युद्धपोतों की तैनाती की अनुमति देंगे। यह समझौता दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। रूस की स्पुतनिक न्यूज एजेंसी ने इस समझौते की जानकारी दी है, जो अब आधिकारिक रूप से प्रभावी हो चुका है।

स्पुतनिक के अनुसार, यह समझौता सैन्य विमानों, नौसैनिक जहाजों और सैन्य इकाइयों की आपसी तैनाती के लिए नए नियमों की रूपरेखा तैयार करता है। इस व्यवस्था के तहत दोनों देशों को लॉजिस्टिक, तकनीकी और ऑपरेशनल सहायता देने की भी अनुमति होगी। यह समझौता 21 अनुच्छेदों में बंटा है और यह पांच साल के लिए वैध रहेगा, हालांकि, अगर दोनों देशों के बीच किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होती तो यह अपने आप बढ़ सकता है।इस समझौते के तहत दोनों देशों के सैनिक संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण, आपदा राहत, मानवीय सहायता और दोनों देशों द्वारा लिए गए विशेष फैसलों के अनुसार तैनात किए जा सकते हैं।

हालांकि, समझौते में यह भी शर्त है कि किसी एक देश में एक साथ 3000 से ज्यादा सैनिक, 10 से ज्यादा विमान या 5 से ज्यादा युद्धपोत तैनात नहीं किए जा सकते। इस समझौते से भारत और रूस को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों तक पहुंच आसान हो जाएगी। भारत को रूस के आर्कटिक क्षेत्र और व्लादिवोस्तोक जैसे सुदूर पूर्वी बंदरगाहों तक पहुंच मिलेगी, जबकि रूस को हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय बंदरगाहों से लाभ होगा। यह समझौता दोनों देशों को रणनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगा। भारत ने पहले अमेरिका के साथ भी एक समान सैन्य समझौता (LEMOA) किया है, जो दर्शाता है कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए किसी एक पक्ष पर निर्भर नहीं है।

भारत और रूस का यह नया समझौता एक और ठोस कदम है, जो दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और बढ़ाएगा। समझौते के तहत दोनों देशों ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वे एक-दूसरे की सैन्य जानकारी और ठिकानों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखेंगे। यह समझौता भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाएगा, जो दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक महत्व रखता है।यह समझौता 2026 की शुरुआत में पूरी तरह लागू हो चुका है और अगले कुछ वर्षों में यह दोनों देशों के रक्षा संबंधों में और भी गहराई लाएगा।

















