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बिना परिसीमन भी लागू हो सकता है महिला आरक्षण: विपक्ष के सुर तेज, प्रियंका चतुर्वेदी का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (अशोक “अश्क”) महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीन विधेयक पेश किए जाने के बाद विपक्ष ने जहां परिसीमन विधेयक पर तीखा विरोध जताया है, वहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने बड़ा दावा करते हुए नई बहस छेड़ दी है।शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता ने कहा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को मौजूदा लोकसभा सीटों पर भी लागू किया जा सकता है।

उन्होंने इस कदम के लिए राष्ट्रपति का आभार जताते हुए इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक अवसर बताया।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पोस्ट में प्रियंका चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि अगर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और आरक्षण लागू करने के लिए प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन संसद में दो-तिहाई बहुमत से पारित नहीं भी होता है, तब भी मौजूदा 543 सीटों पर महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता खुला हुआ है।उन्होंने कहा कि यह वही मांग है जिसे विपक्ष लंबे समय से उठाता रहा है।

उनके अनुसार, अब सरकार चाहे तो बिना परिसीमन के भी महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दे सकती है, जिससे उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी।इस पूरे मुद्दे की जड़ में 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम है, जिसे संसद ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। प्रियंका ने याद दिलाया कि उस समय सभी दलों ने मिलकर यह वादा किया था कि 2029 तक महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे देश का कर्तव्य है।

संसद का दायित्व है कि वह महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करे। इधर परिसीमन को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया को चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि सरकार इसे संवैधानिक प्रक्रिया बता रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार बिना परिसीमन के महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम उठाती है या यह मुद्दा आने वाले चुनावों तक राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।

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