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बिहार कृषि महाविद्यालय में खरीफ फसल 2026 के लिए ऐतिहासिक बैठक: कृषि विकास में नये आयामों की ओर बढ़े कदम

बक्सर, 18 अप्रैल (विक्रांत) बिहार कृषि महाविद्यालय (BAC), सबौर में आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्रीय कृषि विकास के लिए विशेष रणनीतियाँ तय की गई। ज़ोन IIIA के तहत इकतीसवीं क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति (ZREAC) की यह बैठक खरीफ 2026 के लिए आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न जिलों के वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों और किसानों ने भाग लिया। इस बैठक में क्षेत्रीय कृषि समस्याओं, चुनौतियों और संभावनाओं पर गहरी चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता डॉ. अनिल कुमार सिंह, निदेशक अनुसंधान ने की, और इस अवसर पर सहायक निदेशक अनुसंधान डॉ. चंदा कुशवाहा, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर की प्राचार्य प्रो. डॉ. रुबी रानी समेत कई प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में भागलपुर, बांका, मुंगेर, खगड़िया, शेखपुरा, लखीसराय और जमुई जिलों के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के प्रमुख वैज्ञानिकों और किसानों ने भी भाग लिया।कृषि विज्ञानियों और किसानों के बीच खरीफ फसलों से जुड़े कई अहम सवालों पर चर्चा हुई।

उन्नत बीजों, फसल प्रबंधन, जल प्रबंधन, कीट नियंत्रण और रोगों से बचाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से बात की गई। विशेषज्ञों ने इन मुद्दों का समाधान प्रस्तुत किया और किसानों को व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया, ताकि वे कृषि कार्यों में अधिक सफलता हासिल कर सकें। इस बैठक में कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के मार्गदर्शन का भी विशेष उल्लेख किया गया। डॉ. अनिल कुमार सिंह ने उनके नेतृत्व की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय की अनुसंधान और प्रसार गतिविधियाँ अधिक प्रभावी और सुदृढ़ हुई हैं।

इसके साथ ही “सबाग्री” स्टार्टअप पहल के माध्यम से कृषि में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की गई। बैठक में उन्नत कृषि तकनीकों, जलवायु अनुकूल खेती, समेकित पोषण प्रबंधन और फसल विविधीकरण जैसे विषयों पर भी व्यापक चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को इन आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार हो सके। आएकार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. नेहा पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दीपक पटेल ने प्रस्तुत किया। इस बैठक ने कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने का संदेश दिया और किसानों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं।

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