• Home
  • राष्ट्रीय
  • तबादलों पर सुप्रीम कोट की मुहर: बंगाल चुनाव में ECI को खुली छूट, भरोसे के संकट पर कड़ी टिप्पणी
Image

तबादलों पर सुप्रीम कोट की मुहर: बंगाल चुनाव में ECI को खुली छूट, भरोसे के संकट पर कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली, 17 अप्रैल )अशोक “अश्क”) चुनावी सरगर्मी के बीच एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर किए गए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि चुनाव के दौरान इस तरह के तबादले कोई असाधारण कदम नहीं बल्कि पिछले दो दशकों से चली आ रही सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।दरअसल, निर्वाचन आयोग ने चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद राज्य में 1000 से अधिक आईएएस, आईपीएस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया था।

इस फैसले के खिलाफ दायर याचिका को पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद मामला शीर्ष अदालत पहुंचा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब चुनाव के दौरान इस तरह के कदम उठाए गए हों। हालांकि, अदालत ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल को भविष्य के लिए खुला छोड़ दिया क्या निर्वाचन आयोग को ऐसे तबादलों से पहले राज्य सरकार से परामर्श करना अनिवार्य है?

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं की मूल भावना पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच भरोसे की गंभीर कमी साफ नजर आती है। यही वजह है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण जैसे कार्यों में भी अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों का रातों-रात तबादला अभूतपूर्व है, यहां तक कि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे शीर्ष पदों में भी बदलाव किए गए। उन्होंने तर्क दिया कि इससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि जब सभी अधिकारी उसी राज्य कैडर के हैं, तो उनके पद बदलने से क्या फर्क पड़ता है। पीठ ने यह भी कहा कि बाहरी पर्यवेक्षक अक्सर निष्पक्षता सुनिश्चित करने में मददगार होते हैं।अंत में अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल तबादलों में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता, लेकिन भविष्य में उचित मामले में इस संवैधानिक सवाल पर विस्तृत सुनवाई की जा सकती है। बंगाल चुनावों के बीच आया यह फैसला प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में दूरगामी असर डाल सकता है।

Releated Posts

महिला आरक्षण विधेयक पर प्रधानमंत्री मोदी का हमला, विपक्ष को भुगतने होंगे परिणाम

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (अशोक “अश्क”) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक के संसद में न पारित…

8वां वेतन आयोग बना गेमचेंजर, न्यूनतम वेतन ₹69,000 करने की मांग से मची हलचल

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (अशोक “अश्क) केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए 8वें वेतन आयोग…

OCI नियमों में बड़ा बदलाव: अब भारत आते ही करें आवेदन, 6 महीने का इंतजार खत्म

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (अशोक “अश्क”) प्रवासी भारतीयों के लिए भारत सरकार ने OCI कार्ड से जुड़े नियमों…

बिना परिसीमन भी लागू हो सकता है महिला आरक्षण: विपक्ष के सुर तेज, प्रियंका चतुर्वेदी का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (अशोक “अश्क”) महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

<label for="comment">Comment's</label>

Scroll to Top