नई दिल्ली, 25 अप्रैल (अशोक “अश्क”) शादी जैसे संवेदनशील और जटिल रिश्ते को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करने की कोशिश करती गिन्नी वेड्स सन्नी 2 इस हफ्ते सिनेमाघरों में पहुंची, लेकिन उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम रही। साल 2020 की गिन्नी वेड्स सन्नी की फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ाते हुए निर्माता विनोद बच्चन ने नया प्रयोग किया, मगर इस बार जादू फीका नजर आता है। फिल्म की कहानी ऋषिकेश के भोले-भाले सनी (अविनाश तिवारी) और दिल्ली की आधुनिक सोच वाली गिन्नी (मेधा शंकर) के इर्द-गिर्द घूमती है। अलग सोच और जीवनशैली के बावजूद पारिवारिक दबाव में दोनों की शादी हो जाती है।

लेकिन शादी के बाद छुपे हुए सच और विचारों का टकराव रिश्ते को धीरे-धीरे टूटने की कगार पर पहुंचा देता है। निर्देशक प्रशांत झा ने ‘अपोजिट अट्रैक्ट्स’ वाली रोमांटिक कॉमेडी पेश करने की कोशिश की है, लेकिन पटकथा कमजोर साबित होती है। कई सीन खिंचे हुए लगते हैं और दर्शकों को बांधने में असफल रहते हैं। इंटरवल के बाद कहानी पूरी तरह बिखर जाती है, जिससे फिल्म की पकड़ और कमजोर हो जाती है। अभिनय की बात करें तो अविनाश तिवारी कुछ इमोशनल सीन में प्रभाव छोड़ते हैं, लेकिन रोमांटिक हिस्सों में फीके पड़ जाते हैं।

12th फेल के बाद वापसी कर रहीं मेधा शंकर स्क्रीन पर आकर्षक लगती हैं, मगर भावनात्मक दृश्यों में गहराई की कमी साफ दिखती है। सहायक भूमिकाओं में सुधीर पांडेय और रोहित चौधरी ने फिल्म को संभालने की कोशिश की है।फिल्म की सिनेमेटोग्राफी इसकी सबसे मजबूत कड़ी है, जिसमें ऋषिकेश की खूबसूरत वादियों को शानदार तरीके से दिखाया गया है। हालांकि, संगीत औसत है और ‘छाप तिलक’ के अलावा कोई गीत याद नहीं रह जाता।कुल मिलाकर, ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ एक अच्छे विचार के बावजूद कमजोर निर्देशन और नीरस कहानी के कारण दर्शकों को प्रभावित करने में असफल रहती है।
। ~ अशोक “अश्क”
















