नई दिल्ली, 25 अप्रैल (अशोक “अश्क”) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत ने रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच अब भारत ने अमेरिका, रूस समेत कई नए देशों से एलपीजी आयात बढ़ाकर संभावित संकट को टाल दिया है। सरकारी तेल कंपनियां अब सिर्फ लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि स्पॉट मार्केट से भी बड़े पैमाने पर गैस खरीद रही हैं। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर तत्काल डिलीवरी के लिए बाजार भाव पर एलपीजी खरीदी जा रही है, जिससे आपूर्ति में कोई रुकावट न आए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के हफ्तों में कई स्पॉट कार्गो खरीदे गए हैं, जो जून और जुलाई में भारत पहुंचेंगे। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया के तनाव ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स को झकझोर दिया है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को लेकर चिंता बढ़ी हुई है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त तेल-गैस शिपिंग मार्गों में से एक है।हालांकि, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह स्थिर है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, भारत हर दिन करीब 80,000 टन एलपीजी की खपत करता है। पहले करीब 60% जरूरत आयात से पूरी होती थी, लेकिन अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर इसे लगभग 46,000 टन प्रतिदिन तक पहुंचा दिया गया है।

आयात के मोर्चे पर भी भारत ने बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां 90% एलपीजी खाड़ी देशों सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन और ओमन से आता था, वहीं अब नॉर्वे, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी आपूर्ति बढ़ाई जा रही है।सरकार ने इस महीने की शुरुआत में ही करीब 8 लाख टन एलपीजी आयात सुनिश्चित कर लिया था। दिलचस्प बात यह है कि हालिया तनाव के बावजूद होर्मुज मार्ग से आने वाले 10 जहाजों में से 9 में एलपीजी लदी थी, जो सप्लाई चेन की मजबूती को दिखाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीति से भारत ने न सिर्फ संकट को टाला है, बल्कि भविष्य के लिए भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर लिया है। आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद उनके किचन में गैस की आपूर्ति जारी रहने की पूरी उम्मीद है।
















