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रसायन छोड़ अपनाया जैविक खेती का नया तरीका: मिर्जापुर के किसान ने घर में तैयार किए 14 पोषक तत्व, पैदावार में रिकॉर्ड उछाल

लखनऊ, 05 अप्रैल ( लखनऊ डेस्क) उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से खेती की दुनिया में एक प्रेरणादायक और चौंकाने वाली कहानी सामने आई है। यहां के प्रगतिशील किसान योगेंद्र सिंह ने रासायनिक खाद को पूरी तरह छोड़कर जैविक खेती का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो अब अन्य किसानों के लिए मिसाल बनता जा रहा है।

जहां अधिकांश किसान अधिक उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर हैं, वहीं योगेंद्र सिंह ने घर पर ही फसलों के लिए जरूरी 14 से अधिक पोषक तत्व तैयार करने की अनोखी तकनीक विकसित की है। वे फल-सब्जियों के अवशेष, वेस्ट मटेरियल और प्राकृतिक संसाधनों से खाद बनाते हैं, जिससे न सिर्फ लागत कम होती है बल्कि मिट्टी की सेहत भी बेहतर होती है। योगेंद्र बताते हैं कि फसलों को करीब 15 प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।

इनमें से कई प्राकृतिक रूप से मिल जाते हैं, लेकिन कुछ को तैयार करना पड़ता है। इसके लिए वे पानी में वेस्ट डी-कम्पोजर मिलाकर जैविक घोल तैयार करते हैं, जो सभी तत्वों को जल्दी सड़ाकर उपयोगी बना देता है। नाइट्रोजन के लिए गाजर घास और जलकुंभी का उपयोग किया जाता है, जबकि फास्फोरस के लिए मछली के कांटे और पशुओं की हड्डियों का चूरा इस्तेमाल होता है। पोटाश बनाने के लिए केले के छिलके और बेल के गूदे का प्रयोग किया जाता है। वहीं कैल्शियम के लिए अंडे के छिलके और बुझा हुआ चूना उपयोगी साबित हो रहा है। माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के लिए दलहनी फसलें, बेसन, खली, तांबा, लोहे के उपकरण, गेरू मिट्टी और राख का मिश्रण तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया घर पर ही संभव है और इसके कोई दुष्प्रभाव भी नहीं हैं।योगेंद्र सिंह के अनुसार, शुरुआत के एक-दो सालों में थोड़ी कठिनाई आती है, लेकिन बाद में पैदावार रासायनिक खेती से भी ज्यादा हो जाती है। उनका कहना है कि रासायनिक खाद मिट्टी से कार्बन खत्म कर देती है, जबकि जैविक विधि उसे बढ़ाती है—यही टिकाऊ खेती का भविष्य है।

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