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तूफान ने उजाड़ा बिहार कृषि विश्वविद्यालय का खजाना: दुर्लभ आम-लीची की किस्में तबाह, करोड़ों की संपत्ति को भारी नुकसान

बक्सर, 26 30 मई (विक्रांत) 26 मई 2026 को आए भीषण चक्रवाती तूफान ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर को गहरा जख्म दे दिया है। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान, शिक्षण, कृषि उत्पादन और पौध संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों को व्यापक क्षति पहुंचाई है। सबसे बड़ी चिंता वर्षों से संरक्षित दुर्लभ आम और लीची की बहुमूल्य किस्मों के नुकसान को लेकर है, जिसे विशेषज्ञ कृषि अनुसंधान के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं।घटना की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ने महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति एवं बिहार सरकार के कृषि विभाग को विस्तृत प्रतिवेदन भेजा था।

मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कृषि विभाग के संयुक्त सचिव मदन कुमार, अनुभाग पदाधिकारी अमित सिन्हा, जिला कृषि पदाधिकारी प्रेम शंकर प्रसाद, प्रखंड उद्यान पदाधिकारी विशाल कुमार एवं अन्य अधिकारियों की उच्चस्तरीय टीम ने विश्वविद्यालय पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कृषि फार्म, उद्यान निदेशालय, आम एवं लीची के बागान, पॉलीहाउस, संरक्षित खेती इकाइयों, टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला, बीज उत्पादन केंद्र, शैक्षणिक भवनों, छात्रावासों तथा आवासीय परिसरों का जायजा लिया। कई स्थानों पर फलदार वृक्ष जड़ से उखड़े मिले, जबकि सैकड़ों पेड़ों की शाखाएं टूट चुकी थीं।

वर्षों से संरक्षित दुर्लभ पौध प्रजातियों को हुई क्षति ने वैज्ञानिकों और अधिकारियों को चिंतित कर दिया।कुलपति ने कहा कि यह नुकसान केवल भवनों और संरचनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि अनुसंधान और पौध आनुवंशिक संसाधनों की दृष्टि से अपूरणीय क्षति है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने दशकों की मेहनत से आम, लीची और अन्य फलदार पौधों की उन्नत एवं दुर्लभ किस्मों का संरक्षण किया था, जो अब गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।तूफान का असर बीज उत्पादन इकाई पर भी पड़ा है।

किसानों के लिए सुरक्षित रखे जाने वाले गुणवत्तापूर्ण बीजों के भंडारण शेड क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं पॉलीहाउस और संरक्षित खेती इकाइयों की प्लास्टिक शीट, लोहे के ढांचे तथा सिंचाई प्रणाली भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई संरचनाएं पूरी तरह धराशायी हो गईं। विश्वविद्यालय परिसर के शैक्षणिक भवनों, छात्रावासों और आवासीय परिसरों में भी नुकसान की सूचना है। गिरे पेड़ों के कारण विद्युत आपूर्ति और आवागमन प्रभावित हुआ। हालांकि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, कर्मचारी और छात्र राहत एवं सफाई कार्य में जुटे हैं।निरीक्षण टीम ने विस्तृत क्षति प्रतिवेदन प्राप्त कर भौतिक सत्यापन किया तथा आश्वासन दिया कि राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपकर पुनर्निर्माण एवं पुनर्स्थापन के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की अनुशंसा की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि सरकार के सहयोग से दुर्लभ पौध संसाधनों के संरक्षण, क्षतिग्रस्त संरचनाओं के पुनर्निर्माण और अनुसंधान गतिविधियों की बहाली का कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा।

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