नालंदा, 30 मई (अविनाश पांडेय) बिहार सरकार भले ही पूरे राज्य में नशामुक्ति अभियान को पूरी तरह सफल बनाने की चुनौती से जूझ रही हो, लेकिन बिहारशरीफ मंडल कारा इस दिशा में एक मिसाल बनकर उभर रहा है। जेल प्रशासन के लगातार प्रयासों का असर यह है कि मंडल कारा परिसर में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ की उपलब्धता लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। यहां तक कि बंदियों को खैनी जैसी सामान्य नशे की वस्तु भी नहीं मिल पा रही है। (नाम नहीं बताने के शर्त पर) हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आए कुछ बंदियों ने जो जानकारी दी, उसने सभी को हैरान कर दिया।

बंदी के अनुसार, खैनी की लत से परेशान कुछ बंदी अपनी तलब शांत करने के लिए जेल परिसर में लगे नीम के पेड़ों की छाल तक निकालकर चबाने को मजबूर हैं। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि जेल प्रशासन ने नशे के खिलाफ कितनी सख्ती बरत रखी है। जानकारी के मुताबिक मंडल कारा बिहारशरीफ में वर्तमान समय में 800 से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। जेल प्रशासन द्वारा नियमित निगरानी, सघन जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारण जेल के अंदर नशे का कोई नेटवर्क विकसित नहीं हो पाया है। जिला प्रशासन और पुलिस की टीम भी समय-समय पर जेल परिसर में छापेमारी करती है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार का नशीला पदार्थ या प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई है।

कारा प्रशासन का दावा है कि नशामुक्त वातावरण का सकारात्मक प्रभाव बंदियों के स्वास्थ्य पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पहले जहां कई बंदी नशे की लत से जुड़ी शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझते थे, वहीं अब उनकी दिनचर्या अधिक व्यवस्थित और स्वास्थ्य बेहतर हुआ है। जेल प्रशासन की इस पहल को न केवल नशामुक्ति अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि यह भी साबित हो रहा है कि सख्त निगरानी, इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से नशे जैसी सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। मंडल कारा बिहारशरीफ का यह मॉडल अब अन्य जेलों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है।
क्या कहते हैं जेल अधीक्षक
मंडल कारा बिहारशरीफ का यह सकारात्मक बदलाव नालंदा के जिलाधिकारी कुंदन कुमार के सफल नेतृत्व, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा का प्रतिफल है। इसके अलावा कारा महानिरीक्षक रजनीश सिंह के द्वारा नशा मुक्ति को लेकर मिल रहे निर्देशों का पालन जेल प्रशासन करने में जुटा है। वरीय अधिकारियों से नशा मुक्ति को लेकर जेल प्रशासन को दिए जा रहे निर्देशों को धरातल पर उतरने की पूरी कोशिश की जा रही है। जेल प्रशासन द्वारा नियमित सभी वार्डों की तलाशी ली जाती है। नशा से होने वाले बीमारियों के संबंध में बंदियों को जागरूक किया जाता है। अभिषेक पांडेय, जेल अधीक्षक मंडल कारा बिहारशरीफ

















