पटना, 18 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। कांकरिया कोचिंग डिपो को अब एक वॉटर न्यूट्रल रेलवे डिपो के रूप में विकसित किया गया है, जो जल संरक्षण और पुनः उपयोग के क्षेत्र में एक बेजोड़ उदाहरण पेश कर रहा है। यह पहल रेलवे संचालन को पारंपरिक मॉडल से एक पर्यावरण-अनुकूल और सस्टेनेबल रूप में बदलने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रही है।

कांकरिया डिपो ने पानी की बचत के लिए एक फाइटोरेमेडिएशन तकनीक का सहारा लिया है, जो अपशिष्ट जल के उपचार के लिए पौधों का उपयोग करता है। इस प्रणाली के माध्यम से, डिपो प्रतिदिन लगभग 1.60 लाख लीटर पानी बचा रहा है, जो लगभग 300 घरेलू जल टैंकों के बराबर है। यह तकनीक न केवल पर्यावरण की रक्षा करती है, बल्कि ताजे पानी के स्रोतों पर निर्भरता भी कम करती है। यह बहु-चरणीय जल शुद्धिकरण प्रक्रिया वैज्ञानिक रूप से तैयार की गई है, जिसमें प्राकृतिक और तकनीकी विधियों का संयोजन किया गया है।

उपचारित जल को यूवी कीटाणुशोधन और कार्बन-रेत निस्पंदन से गुजारा जाता है, जिससे यह फिर से डिपो के कार्यकलापों में उपयोग के लिए सुरक्षित हो जाता है। इससे जल की गुणवत्ता में सुधार होता है और इसके पुनः उपयोग की प्रक्रिया की दक्षता बढ़ती है। इस प्रौद्योगिकी से न केवल पर्यावरण का संरक्षण हो रहा है, बल्कि रेलवे के संचालन की लागत में भी कमी आई है। कांकरिया डिपो की यह पहल जल खपत को नियंत्रित करने के साथ-साथ लागत में बचत करने में भी सफल रही है।

इस परियोजना के अंतर्गत हर वर्ष लगभग 5.84 करोड़ लीटर पानी की बचत हो रही है, जो इस डिपो को भारतीय रेलवे के जल प्रबंधन का आदर्श केंद्र बना रही है। कांकरिया कोचिंग डिपो का यह परिवर्तन रेलवे की समग्र कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव लाता है, जिससे न केवल पर्यावरणीय दायित्वों को पूरा किया जा रहा है, बल्कि स्थिरता और संसाधन संरक्षण के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता भी मजबूत हो रही है।















