मुजफ्फरपुर, 22 अक्टूबर (संतोष गुप्ता) हाल के दिनों में हुई लगातार बारिश और चक्रवाती हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की कटाई जहां जलजमाव के कारण प्रभावित हुई है, वहीं आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर भी मौसम की मार पड़ रही है। खेतों में अत्यधिक नमी और निचले इलाकों में अब भी पानी जमा रहने के कारण तोरी (सरसों) समेत अन्य रबी फसलों की बोआई करीब 15 दिन पिछड़ने की आशंका है। आमतौर पर अक्टूबर के पहले सप्ताह से तोरी की बोआई शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार हथिया नक्षत्र में हुई भारी बारिश और बागमती नदी के जलस्तर में वृद्धि ने खेतों की स्थिति बिगाड़ दी है।

बंदरा, गायघाट, औराई, कटरा और पारू के बाढ़ प्रभावित तथा चौर क्षेत्रों में कई निचले खेतों में अब भी पानी जमा है। ऐसे में ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि मशीनों का खेतों में पहुंचना मुश्किल हो गया है। मड़वन में नहर टूटने से करीब 200 एकड़ फसल प्रभावित होने की सूचना है।इधर, राज्य सरकार ने एक नवंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा की है। खेतों में धान पककर तैयार है, लेकिन पानी और नमी के कारण कटाई की रफ्तार सुस्त है। सकरी, चांदपुरा, हत्था, बेरूआ, सूरा और धोबौली समेत कई इलाकों में किसान मशीनों के बजाय मजबूरी में मैनुअल कटाई कर रहे हैं। हालांकि, धान रोपनी के मामले में जिले ने शानदार प्रदर्शन किया है।

जिला कृषि कार्यालय के अनुसार 1,54,088.25 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 1,53,896.45 हेक्टेयर में धान की रोपनी हुई, जो 99.88 प्रतिशत है। बंदरा, बोचहां और मीनापुर ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। कुढ़नी में 13,438.9, औराई में 12,538.5, मोतीपुर में 12,301.5, गायघाट में 11,053.5 और कटरा में 11,019.5 हेक्टेयर में धान का आच्छादन हुआ।जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण ने बताया कि बारिश से कटाई और रबी की तैयारी प्रभावित हुई है, लेकिन किसान लगातार फसल समेटने में जुटे हैं। विभाग किसानों को मौसम के अनुरूप कृषि कार्य करने और रबी फसलों की बोआई के लिए तकनीकी सलाह व आवश्यक सहयोग दे रहा है।

















