• Home
  • कृषि
  • कृषि शिक्षा में AI की दस्तक: बीएयू सबौर में 10 दिन चला हाईटेक प्रशिक्षण, शिक्षकों ने सीखे शोध के नए गुर
Image

कृषि शिक्षा में AI की दस्तक: बीएयू सबौर में 10 दिन चला हाईटेक प्रशिक्षण, शिक्षकों ने सीखे शोध के नए गुर

बक्सर, 14 अक्टूबर (विक्रांत) कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने शिक्षकों और शोधकर्ताओं को नई तकनीक से लैस करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय की ओर से 5 से 14 अक्टूबर 2026 तक “कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: मूलभूत सिद्धांतों से उन्नत अनुप्रयोगों तक” विषय पर दस दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन टीचिंग एंड लर्निंग (सीईटीएल) ने कृषि प्रसार शिक्षा विभाग के सहयोग से किया।एफडीपी का उद्देश्य संकाय सदस्यों को कृषि शिक्षा, अनुसंधान, अकादमिक लेखन, आंकड़ा विश्लेषण और वैज्ञानिक संचार में AI एवं जनरेटिव AI के प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था।

कार्यक्रम में शिक्षण की गुणवत्ता, शोध उत्पादकता और अकादमिक नवाचार बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक AI उपकरणों की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा हुई।प्रशिक्षण के दौरान प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, AI आधारित शिक्षण-अधिगम, टेक्स्ट एनालिटिक्स, जनरेटिव AI से कृषि अनुसंधान, आंकड़ा विश्लेषण एवं विजुअलाइजेशन, वैज्ञानिक रिपोर्ट लेखन, सटीक कृषि अनुसंधान, AI आधारित Python प्रोग्रामिंग और साहित्य समीक्षा जैसे विषयों पर व्याख्यान और व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। पादप रोगों की पहचान के लिए व्याख्येय AI आधारित डीप लर्निंग तकनीक को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया।कार्यक्रम में बिट्स पिलानी, आईसीएआर-भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, आईसीएआर-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, आईसीएआर-भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान, पांडिचेरी विश्वविद्यालय तथा भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भागलपुर समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए।

बीएयू सबौर और व्यावसायिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी विभिन्न सत्रों में शामिल हुए।कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि AI कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार में बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि इसका प्रभावी इस्तेमाल शिक्षण गुणवत्ता सुधारने, शोध दक्षता बढ़ाने, जटिल कृषि आंकड़ों के विश्लेषण और नई चुनौतियों के समाधान विकसित करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप शैक्षणिक समुदाय को तैयार करना जरूरी है। विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में डिजिटल दक्षता, नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

Releated Posts

जलजमाव ने गन्ने पर बरपाया कहर: जड़ों में सड़न से सूख रही फसल, मजदूरों की कमी ने बढ़ाई किसानों की परेशानी

मधुबनी, 14 अक्टूबर (आशीष यादव) प्रखंड क्षेत्र में लगातार हुई बारिश और खेतों में जलजमाव ने किसानों की…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 14, 2026

समस्तीपुर में फलों की खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर: अमरुद-नींबू के लिए 60 हेक्टेयर का लक्ष्य, अनुदान से बढ़ेगी आमदनी

समस्तीपुर, 14 अक्टूबर (हर्षिता “अश्क”) जिले में किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 14, 2026

वैज्ञानिक खेती से बदलेगी पान की तस्वीर, 25 किसानों को मिला उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण

बक्सर, 10 अक्टूबर (विक्रांत) पान की खेती को अधिक उत्पादनकारी, गुणवत्तापूर्ण और लाभकारी बनाने की दिशा में बिहार…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 10, 2026

मखाना की चमकेगी किस्मत: छह केंद्रों में लगेंगी प्रसंस्करण इकाइयां, किसानों की बढ़ेगी कमाई

बक्सर, 30 सितम्बर (विक्रांत) बिहार में मखाना उत्पादन को नई ऊंचाई देने और किसानों को कच्चे उत्पाद की…

ByByअशोक अश्क सितम्बर 30, 2026

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top