पटना, 21 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार में शिक्षा विभाग को पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने की दिशा में शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी ने कई बड़े फैसलों की घोषणा की है। एमएलसी चुनाव के बीच सामने आए इन फैसलों से विभागीय कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच हलचल तेज हो गई है। सबसे अहम निर्णय लंबे समय से एक ही जगह जमे क्लर्क कर्मचारियों के तबादले को लेकर है। अब क्लर्कों का कैडर डिविजनल के बजाय राज्यस्तरीय करने की प्रक्रिया चल रही है। छठ पूजा के बाद राज्य स्तर पर तबादला प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।विभाग में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित क्लर्कों पर शिक्षकों से शोषण और रिश्वत मांगने के आरोप लगते रहे हैं। राज्यसभा सांसद अनिल यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए शिक्षकों के कथित शोषण पर चिंता जताई थी।

क्षेत्रीय उपनिदेशक शिक्षा सुभाष कुमार गुप्ता ने भी कैडर परिवर्तन की प्रक्रिया की पुष्टि की है। सरकार का मानना है कि स्थानांतरण व्यवस्था में बदलाव से विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी।इधर, शिक्षकों के सातवें वेतनमान को लेकर भी बड़ी घोषणा हुई है। मंत्री ने कहा है कि इस मुद्दे पर 30 दिनों के भीतर औपचारिक निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को दूसरे राज्यों में शिक्षकों को मिलने वाली सुविधाओं का तुलनात्मक अध्ययन करने और प्रस्ताव से राज्य के खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी एमएलसी चुनाव अभियान के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा चुके हैं। शिक्षा की गुणवत्ता और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार ‘गुरुकुलम’ स्थापित करने की तैयारी में है।

इसकी शुरुआत भागलपुर से होगी और बाद में बक्सर में भी ऐसे संस्थान खोले जाएंगे। गुरुकुलम में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शोध तक की सुविधा होगी। वैदिक अध्ययन और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ विज्ञान, एआई, अंग्रेजी और हिंदी साहित्य की पढ़ाई कराई जाएगी। शिक्षकों की नियुक्ति दक्षिण भारत से किए जाने की योजना है। परियोजना में कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य और बेंगलुरु स्थित सत्य साईं संस्थान के सहयोग की बात कही गई है।















