साहित्य
जब डूबने लगूं तो किनारा मिले मुझे
आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में बंगाल, आसनसोल से सुप्रसिद्ध शाइरा ग़ज़ाला तबस्सुम जी की एक ग़ज़ल पहले…
उनकी निगाहों से खौफ़ आता है
आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में आर के जैन “राकेश” जी की एक ग़ज़ल न बेरुखी न जफ़ाओं…






















