Image

इंतज़ार

आज साहित्यिक आंगन में बिहार, बेगूसराय जिले की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. सुनीता ‘सुमन’ जी की एक कविता

ये कौन मेरे दिल की कस्ती पे सफ़र करता है ?

है कौन जो तन्हाई की झील में कंकर मारता है ?

हवाएं भी सहमी सी गुज़र जाती है जहां से अक्सर…

है कौन जो बेख़ौफ़ मेरे दर पे

दस्तक सा दे जाता है….

तंग कमरे….. ऊँची दीवारें…..

खड़ी कर रख्खी है मैंने

फिर क्यों है तनहाईयों का शोर इतना

जो गूंजता रहती है हर ओर इतना ?

हमने सुनने को मना कर दिया धड़कन तक को

फिर ये पद्चाप किसकी आती है ?

झरोखा कौन ये खुला छोड़ गया है आखिर

क्यों आ के यहां चिडियां चहचहाती है ?

मन को समझाया सौ दफ़ा फिर क्यूं

हद है मनमानी की……

मयूर हुआ जाता है !

हम न निकलेंगे कभी

यादों के सफ़र पे

यही ठाना था,

हमको हर बार

अपने दिल को ये समझना था।

कौन जो दिल की दहलीज पे छाप छोड़ गया

राह में उम्र भर का साथ छोड़ गया

एक वादे को निभाने के लिए

घड़कनें आज़ भी कुछ बाकी है

उसकी यादों का सफ़र लंबा है

दूर तक उसके निशां बाकी हैं…..

दूर बहुत दूर तलक जाकर

उदास नज़रें लौट आती हैं…….

~ डॉ सुनीता ‘सुमन’

Releated Posts

हाथों में जान लेकर

आज साहित्यिक आंगन में बिहार, समस्तीपुर जिले के अशोक “अश्क” की एक ग़ज़ल सीने में दफ़्न अपनी हर…

नवाज़िश

आज सेअहितयिक आंगन में उत्तर प्रदेश, अयोध्या की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ स्वदेश मल्होत्रा ‘रश्मि’ जी एक ग़ज़ल दुनिया…

मज़लूम ज़िल्ल्तों से निकाले कहाँ गये

आज साहित्यिक आंगन में सुप्रसिद्ध कवयित्री कविता सिंह “वफ़ा” जी की एक शानदार ग़ज़ल अम्नो अमान चाहने वाले…

हौसला

आज साहित्यिक आंगन में तमिलनाडू, चेन्नई की सुप्रसिद्ध कवयित्री शिल्पा बम्ब (जैन) जी की एक दिलकश मुक्तक मिलेगी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top