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नागफनी

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली की सुविख्यात कवयित्री अंशु विनोद गुप्ता जी की एक ग़ज़ल

रोम रोम में काँटे उगते नागफनी से।

रंग-बिरंगे फूल महकते नागफनी से।

मैदानों के बाग बगीचे आकर्षण हैं,

सहराओं में मधुबन दिखते नागफनी से।

फूल अनोखे रंग बिरंगे हृदय लुभाएँ,

भौरें आकर रस ले उड़ते नागफनी से।

औषध गुण इसके हैं निराले रूप निखारे,

जीर्ण रोग सब तन के मिटते नागफनी से।

मांसल पत्ते गूदे वाले स्वाद तिक्त है,

तरह तरह के व्यंजन बनते नागफनी से।

~ अंशु विनोद गुप्ता

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