Image

कैसे तुझे हारा देखूं

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में उत्तर प्रदेश, कौशाम्बी से सुप्रसिद्ध कवि विनोद कुमार जी की एक ग़ज़ल

मैं तेरा बाप हूँ कैसे तुझे हारा देखूं।

आज के बाद ये मंज़र न दुबारा देखूं।

इस नये दौर से बस इतनी गुज़ारिश है मेरी,

अपने बच्चों में बुढ़ापे का सहारा देखूं।

तेरी तस्वीर बसी है मेरी इन आँखों में,

तो भला क्यूँ मैं कोई और नज़ारा देखूं।

ख़ुद-ब-ख़ुद नाम जुबां पर तेरा आ जाता है,

आसमां में कोई जब टूटता तारा देखूं।

घर में आते ही बहू, क्यूँ मेरे बेटे मैं तुझे,

हाथ से जैसे फिसलता हुआ पारा देखूं।

मुफ़लिसों को भी मिले न्याय अमीरों कि तरह

है तमन्ना कोई ऐसा भी इदारा देखूं।

चार बच्चों का मुझे बाप न कहिये यारों,

कुछ करो यूँ कि मैं भी ख़ुद को कुँवारा देखूं।

~ विनोद कुमार

Releated Posts

PK का शिक्षा मंत्री पर तंज, बोले- तेजस्वी को 10वीं पास करने की सलाह है तो अगली कैबिनेट में CM को भी दें सुझाव

पटना, 25 अगस्त (सहयोगी संवाददाता विक्रांत) छात्रों के प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के बयान को लेकर…

PMFME में बजा बिहार का डंका: सबसे ज्यादा स्वीकृतियां मिलने पर मिला बेस्ट स्टेट का प्रतिष्ठित सम्मान

नई दिल्ली, 25 अगस्त (अशोक “अश्क”) प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत सर्वाधिक संख्या…

बिहार के छात्रों की पढ़ाई में आया डिजिटल क्रांतिकारी: विद्या साथी ऐप लॉन्च, आधी रात को भी मिलेगा लाइव शिक्षक का साथ

पटना, 24 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार के स्कूली विद्यार्थियों की पढ़ाई को आसान, प्रभावी और आधुनिक बनाने की…

फर्जी कॉलेजों पर सरकार का शिकंजा: मान्यता होगी रद्द, दर्ज होगी FIR, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड घोटाले पर भी सख्त कार्रवाई

पटना, 20 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार सरकार ने फर्जीवाड़ा कर एक से अधिक महाविद्यालयों का संचालन करने वाले…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top