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सपनों की मेट्रो पर लगा ब्रेक: मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और भागलपुर में अटकी परियोजना, दो साल बाद भी नहीं बनी डीपीआर

पटना, 15 जुलाई (अविनाश कुमार) बिहार के चार बड़े शहरों मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और भागलपुर में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है। करीब दो वर्ष पहले रूट तय होने और सर्वे प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का काम शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में इन शहरों में जल्द मेट्रो दौड़ने की उम्मीदों को फिलहाल बड़ा झटका लगा है। राज्य मंत्रिमंडल ने जून 2024 में चारों शहरों के लिए मेट्रो परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद सर्वे और फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी राइट्स (RITES) को सौंपी गई। एजेंसी ने जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों से सुझाव लेने के बाद 16 फरवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंप दी। रिपोर्ट में प्रस्तावित रूट, अलाइनमेंट और अन्य तकनीकी पहलुओं का विस्तृत विवरण शामिल है।

सरकार ने पहले कहा था कि फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर तैयार कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परियोजना की लागत में केंद्र और राज्य सरकार 20-20 प्रतिशत राशि वहन करेंगी, जबकि शेष 60 प्रतिशत धनराशि वित्तीय संस्थानों से जुटाने की योजना बनाई गई है। हालांकि अब तक डीपीआर तैयार करने की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से परियोजना अगले चरण में नहीं पहुंच सकी है। नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से भी डीपीआर तैयार होने की समयसीमा को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।सर्वे रिपोर्ट के अनुसार चारों शहरों में दो-दो मेट्रो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं।

गया में लगभग 36 किलोमीटर लंबा सबसे बड़ा नेटवर्क प्रस्तावित किया गया है। दरभंगा के लिए 18.8 किलोमीटर, भागलपुर के लिए करीब 24 किलोमीटर और मुजफ्फरपुर के लिए 21.25 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है। इधर, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बिहार के कई रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण तेजी से जारी है। छोटे स्टेशनों पर निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है, जबकि पटना जंक्शन और दानापुर स्टेशन के पुनर्विकास में अभी समय लगेगा। वहीं बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास अंतिम चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में जहां रेलवे स्टेशन आधुनिक स्वरूप ले रहे हैं, वहीं बिहार के चार प्रमुख शहरों की बहुप्रतीक्षित मेट्रो परियोजना अब भी डीपीआर के इंतजार में अटकी हुई है।

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