Image

कैसे तुझे हारा देखूं

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में उत्तर प्रदेश, कौशाम्बी से सुप्रसिद्ध कवि विनोद कुमार जी की एक ग़ज़ल

मैं तेरा बाप हूँ कैसे तुझे हारा देखूं।

आज के बाद ये मंज़र न दुबारा देखूं।

इस नये दौर से बस इतनी गुज़ारिश है मेरी,

अपने बच्चों में बुढ़ापे का सहारा देखूं।

तेरी तस्वीर बसी है मेरी इन आँखों में,

तो भला क्यूँ मैं कोई और नज़ारा देखूं।

ख़ुद-ब-ख़ुद नाम जुबां पर तेरा आ जाता है,

आसमां में कोई जब टूटता तारा देखूं।

घर में आते ही बहू, क्यूँ मेरे बेटे मैं तुझे,

हाथ से जैसे फिसलता हुआ पारा देखूं।

मुफ़लिसों को भी मिले न्याय अमीरों कि तरह

है तमन्ना कोई ऐसा भी इदारा देखूं।

चार बच्चों का मुझे बाप न कहिये यारों,

कुछ करो यूँ कि मैं भी ख़ुद को कुँवारा देखूं।

~ विनोद कुमार

Releated Posts

विश्व पर्यावरण दिवस अभियान में दानापुर मंडल की अनूठी पहल, सफाई मित्रों को फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

बक्सर, 29 मई (विक्रांत) विश्व पर्यावरण दिवस-2026 अभियान के तहत दानापुर मंडल ने पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता…

बिहार में मौसम का तांडव: 107 KM की रफ्तार से चली आंधी, कई जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट

पटना, 29 मई (अविनाश कुमार) बिहार में मौसम ने अचानक खतरनाक करवट ले ली है। राजधानी पटना समेत…

आधी रात के तूफान ने मचाई तबाही: बिहार कृषि विश्वविद्यालय में करोड़ों का नुकसान, सैकड़ों पेड़ धराशायी

बक्सर, 26 मई (विक्रांत) सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय परिसर में देर रात आई भीषण आंधी और तेज…

रॉन्ग साइड बनी काल: स्कॉर्पियो की टक्कर से युवक की दर्दनाक मौत, धू-धू कर जली बाइक

नालन्दा, 24 मई (अविनाश पांडेय) हारशरीफ के दीपनगर थाना क्षेत्र स्थित सकरौल गांव के पास रविवार को हुए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top