नई दिल्ली, 19 अप्रैल (अशोक “अश्क”) भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को बड़ी रफ्तार देते हुए एक ऐसा प्रोजेक्ट सामने आया है, जिसने शुरुआत से पहले ही इतिहास रच दिया है। ओडिशा में बनने जा रहे अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर प्लांट की पूरी उत्पादन क्षमता पहले ही एडवांस बुक हो चुकी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शिलान्यास के दौरान इसका खुलासा करते हुए कहा कि प्लांट शुरू होने से पहले ही बाजार में इसकी भारी मांग सुनिश्चित हो चुकी है।

करीब 2.5 साल में तैयार होने वाला यह प्लांट भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब तक भारत को चिप्स के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन यह परियोजना देश को हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की ओर ले जाएगी। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी अत्याधुनिक 3डी ग्लास सबस्ट्रेट तकनीक है, जो पारंपरिक सिलिकॉन आधारित तकनीक से कहीं अधिक उन्नत मानी जाती है।

पहली बार भारत में इतने बड़े स्तर पर इस तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे भविष्य के हाई-परफॉर्मेंस चिप्स का निर्माण संभव होगा।करीब 2,000 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश से बनने वाले इस प्लांट में हर साल 70,000 ग्लास पैनल, 50 मिलियन असेंबल्ड यूनिट और 13,200 3डी एचआई मॉड्यूल का उत्पादन किया जाएगा। साथ ही इससे 2,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बल मिलेगा।

राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे ओडिशा के लिए नए औद्योगिक युग की शुरुआत बताया है। अब तक खनिज आधारित उद्योगों के लिए पहचाने जाने वाला राज्य, इस प्रोजेक्ट के जरिए हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्लांट न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से अहम है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी निर्माण में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की ओर अग्रसर है।
















