नई दिल्ली, 19 अप्रैल (अशोक “अश्क”) दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव लगातार गहराता जा रहा है। यह वही रास्ता है, जहां से रोजाना करोड़ों बैरल तेल गुजरता है। अगर यह मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। लेकिन इसे बंद करना जितना आसान दिखता है, दोबारा खोलना उतना ही मुश्किल और महंगा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति को एक मजबूत सैन्य ढाल में बदल दिया है। लंबी और टेढ़ी-मेढ़ी तटरेखा, ऊंचे पहाड़, गुफाएं और सुरंगें इसे प्राकृतिक किले का रूप देती हैं।

इन इलाकों में मिसाइल, ड्रोन और छोटे हथियार छिपाकर दुश्मन को अचानक निशाना बनाया जा सकता है। खासकर क़ेश्म द्वीप जैसे ठिकानों पर ईरान की मजबूत सैन्य मौजूदगी इसे और खतरनाक बनाती है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस जलमार्ग की भौगोलिक जटिलता है। कई जगह पानी उथला है, जिससे बड़े युद्धपोतों की गति सीमित हो जाती है। वहीं, तट से दागी जाने वाली मिसाइलें और ड्रोन हमले हर समय खतरा बने रहते हैं। ईरान ‘हिट एंड रन’ रणनीति के तहत छोटे-छोटे हमले कर दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले सबक ने ईरान की रणनीति को और धार दी है।

इस युद्ध ने दिखाया कि सस्ते ड्रोन और मिसाइलें भी महंगे युद्धपोतों को तबाह कर सकती हैं। ईरान अब इसी असममित युद्ध नीति को अपनाकर अपनी ताकत बढ़ा रहा है। होर्मुज के आसपास सऊदी अरब, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के अहम तेल टर्मिनल मौजूद हैं। किसी भी संघर्ष की स्थिति में ये भी निशाने पर आ सकते हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी। करीब 56 किलोमीटर चौड़े इस समुद्री मार्ग को नियंत्रित करना आसान नहीं है। अगर ईरान इसे ब्लॉक करता है, तो बाहर निकलने वाले जहाजों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इसे दोबारा खोलने में भारी सैन्य ताकत, समय और संसाधन लगेंगे, साथ ही जान-माल का बड़ा नुकसान भी हो सकता है।कुल मिलाकर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है जहां एक चिंगारी पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट में झोंक सकती है।

















