नई दिल्ली, 19 अप्रैल (अशोक “अश्क”) आंध्र प्रदेश के कुरनूल ज़िले से एक ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है, जहाँ आज़ादी के बाद पहली बार किसी बड़े निजी सोने की खदान से उत्पादन शुरू होने वाला है। जियोमाइसोर सर्विसेज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट का प्रोसेसिंग प्लांट मई के पहले सप्ताह में चालू होने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्लांट में इन दिनों तेज़ गतिविधियाँ देखी जा रही हैं और वाणिज्यिक उत्पादन से पहले की सभी प्रक्रियाएँ अंतिम चरण में हैं।

अब तक भारत में सोने की मांग मुख्यतः आयात पर निर्भर रही है। देश हर वर्ष 800 टन से अधिक सोना विदेशों से मंगाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ता है। घरेलू उत्पादन की बात करें तो सरकारी स्वामित्व वाली हुट्टी गोल्ड माइंस ही एकमात्र प्रमुख उत्पादक रही है, जो सालाना लगभग 1.5 टन सोना निकालती है। वहीं, कोलार गोल्ड फील्ड्स के वर्ष 2000 में बंद होने के बाद बड़े पैमाने पर खनन में एक लंबा ठहराव आ गया था।

करीब 598 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला जोन्नागिरी प्रोजेक्ट जियोमाइसोर कंपनी द्वारा विकसित किया गया है, जिसे थ्रिवेनी अर्थमूवर्स और डेक्कन गोल्ड का समर्थन प्राप्त है। इस परियोजना में अब तक ₹400 करोड़ से अधिक का निवेश हो चुका है। अनुमान है कि पूरी क्षमता पर यह खदान अगले 15 वर्षों तक हर साल लगभग 1,000 किलोग्राम शुद्ध सोना उत्पादन कर सकती है। इस परियोजना के सर्टिफाइड रिसोर्स 13.1 टन सोना हैं, जबकि संभावित संसाधन 42.5 टन तक हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत के खनन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देगा और देश को खनिज आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जाएगा। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा मई की शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित किए जाने की संभावना है। वहीं, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इसे भारत की खनन महत्वाकांक्षाओं के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है। परियोजना के तहत आसपास के गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और कौशल विकास जैसे सामाजिक कार्य भी किए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि भले ही इससे तुरंत आयात में बड़ी कमी न आए, लेकिन यह एक संरचनात्मक बदलाव है, जो भारत को अपने खनिज संसाधनों के दोहन की नई दिशा दिखाता है।
















