आज साहित्यिक आंगन में उत्तर प्रदेश, अयोध्या की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ स्वदेश मल्होत्रा ‘रश्मि’ जी की एक ग़ज़ल

जहां लगता बहुत प्यारा अगर तुम शायरी करती।
मगन मन रहता मतवाला अगर तुम शायरी करती ।
बहुत मुश्किल है दुनिया में न जाने कितने ग़म बाकी,
न कुछ भी सोचना पड़ता अगर तुम शायरी करती।
औरतों के मुकद्दर में है बनकर के शमअ जलना,
जहां परवाना हो जाता अगर तुम शायरी करती।
सजा लेती जो गहने गीत ग़ज़लों के सरापा तुम,
नया उन्वान मिल जाता अगर तुम शायरी करती।
तुम्हारा दर्द सारा लफ़्ज़ पी जाते असानी से,
सकूं मिलता अरी बहना अगर तुम शायरी करती।
हुनर सीखो कमाने का अगर जीना है मस्ती से,
रूहानी जीस्त बन जाता अगर तुम शायरी करती।
बिखरती ‘रश्मि’ जीवन में अगर मुंसिफ सही होता,
सभी सुनते तेरा कहना अगर तुम शायरी करती
~ डॉ स्वदेश मल्होत्रा ‘रश्मि’

















