नई दिल्ली, 14 अप्रैल (अशोक “अश्क”) नेशनल हाईवे पर ओवरलोड होकर चलने वाले वाहनों के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी नए नियम 15 अप्रैल से पूरे देश में लागू हो गए हैं, जिससे अब नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ना तय है। मंत्रालय की नई अधिसूचना के तहत अब ओवरलोडिंग के प्रतिशत के आधार पर शुल्क वसूला जाएगा।

यदि कोई वाहन निर्धारित सीमा से 10 प्रतिशत तक अधिक लोड लेकर चलता है, तो उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन 10 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक ओवरलोड पाए जाने पर आधार दर का दोगुना शुल्क देना होगा। वहीं, 40 प्रतिशत से अधिक ओवरलोडिंग पर चार गुना तक जुर्माना वसूला जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम सड़क दुर्घटनाओं को कम करने, वाहनों की निर्धारित क्षमता का पालन सुनिश्चित करने और सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

ओवरलोडिंग के कारण सड़कों पर दबाव बढ़ता है, जिससे उनका तेजी से नुकसान होता है और हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। नए नियमों के तहत ओवरलोड शुल्क की वसूली केवल फास्टैग के माध्यम से की जाएगी और संबंधित वाहन का विवरण नेशनल व्हीकल रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। वहीं, जिन टोल प्लाजा पर प्रमाणित वजन मापने की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, वहां ओवरलोड शुल्क नहीं वसूला जाएगा।

इसके अलावा, फास्टैग नहीं होने या निष्क्रिय होने की स्थिति में वाहन चालकों को पहले से लागू नियमों के तहत 25 प्रतिशत अतिरिक्त टोल शुल्क देना होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस सख्ती से ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण लगेगा, सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित व व्यवस्थित बनेगी।

















