लखनऊ, 10 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) अप्रैल में मौसम की मार ने उत्तर प्रदेश के किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसान गहरी चिंता में डूब गए हैं। सबसे ज्यादा असर गेहूं की पकी फसल पर पड़ा है। कई जिलों में खेतों में पानी भर गया है और फसलें जमीन पर गिर गई हैं। दाने खराब होने लगे हैं, जिससे उत्पादन और आय दोनों पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।

सरसों, चना, मसूर और मटर जैसी रबी फसलें भी इस प्राकृतिक आपदा से अछूती नहीं रहीं।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग ने तुरंत एडवाइजरी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि भीगी हुई खड़ी फसल को 1-2 दिन सूखने दें। कटी हुई फसल को खेत में पानी जमा न होने दें और उसे बोझा बनाकर खड़ा कर दें। खलिहान में रखी फसल को अच्छी धूप और हवा में सुखाने के बाद ही मड़ाई करने की हिदायत दी गई है।

इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रभावित जिलों बाराबंकी, अयोध्या, आजमगढ़, अमेठी समेत कई क्षेत्रों का हवाई सर्वे किया। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है और नुकसान का आकलन कर जल्द मुआवजा दिया जाएगा। किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर संबंधित विभाग को दें और फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें। साथ ही, गीली फसल को सुखाकर ही भंडारण करें, ताकि फफूंद से बचाव हो सके। इस आपदा ने किसानों की मेहनत पर गहरी चोट पहुंचाई है, लेकिन सरकार और विभाग के प्रयासों से राहत की उम्मीद अभी बाकी है।

















