पटना, 29 मई (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू परिवार सुर्खियों में है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (जजद) के प्रमुख तेजप्रताप यादव के राजनीतिक भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों की मानें तो लालू यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तेजप्रताप यादव को विधान परिषद भेजने की तैयारी में हैं, लेकिन तेजप्रताप की एक शर्त ने पूरे समीकरण को उलझा दिया है। बताया जा रहा है कि तेजप्रताप यादव ने साफ कर दिया है कि अगर वह विधान परिषद जाएंगे तो अपनी पार्टी जजद के टिकट पर ही चुनाव लड़ेंगे, राजद के सिंबल पर नहीं।

तेजप्रताप की इस जिद ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार तेजस्वी यादव नहीं चाहते कि राजद की एकमात्र सुरक्षित सीट किसी अलग राजनीतिक पहचान को मजबूत करने का माध्यम बने। इधर, परिवार के भीतर चल रही खामोश तनातनी अब खुलकर सामने आने लगी है। तेजस्वी यादव का मानना है कि परिवार का कोई भी सदस्य पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग संदेश नहीं दे सकता। ऐसे में तेजप्रताप की अलग राह ने राजद नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। बता दें कि बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव होना है। 243 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 25 विधायकों का समर्थन जरूरी है।

महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं, ऐसे में गठबंधन मुश्किल से एक सीट निकाल सकता है। यही कारण है कि उम्मीदवार चयन राजद के लिए सिरदर्द बन गया है। इधर, लालू यादव जल्द ही स्वास्थ्य जांच के लिए सिंगापुर जाने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात बेटी रोहिणी आचार्य से होगी। चर्चा है कि परिवार रोहिणी को भी सक्रिय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी देने पर विचार कर रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि लालू परिवार की सियासी विरासत का अगला चेहरा कौन होगा।














