पटना, 28 मई (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में एक बार फिर बांकीपुर विधानसभा सीट चर्चा के केंद्र में आ गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर होने वाला उपचुनाव अब प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदलता दिख रहा है। लंबे समय तक बीजेपी का अभेद्य किला मानी जाने वाली बांकीपुर सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं। खास बात यह है कि जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस सीट को लेकर आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है। सूत्रों के अनुसार, प्रशांत किशोर बीजेपी को सीधी चुनौती देने के लिए महागठबंधन से भी सहयोग मांग रहे हैं।

उनकी कोशिश है कि चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होने के बजाय सीधे बीजेपी और जन सुराज के बीच हो। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाने के लिए विपक्ष अंदरखाने एकजुट हो सकता है।बांकीपुर सीट पर बीजेपी का दबदबा कई दशकों से कायम रहा है। नितिन नबीन लगातार पांच बार यहां से विधायक चुने गए हैं। उनसे पहले उनके पिता भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कायस्थ बहुल इस इलाके को बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है। वर्ष 2015 में महागठबंधन की प्रचंड लहर के बावजूद भी विपक्ष यहां बीजेपी को पराजित नहीं कर पाया था।इधर, प्रशांत किशोर के हालिया बयानों ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

मोतिहारी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा था कि बांकीपुर जीतने के लिए “जो भी करना पड़ेगा, करेंगे।” इसके बाद से यह कयास तेज हो गया है कि महागठबंधन के कुछ दल रणनीतिक तौर पर जन सुराज का समर्थन कर सकते हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरजेडी और कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक, खासकर अल्पसंख्यक और यादव मतदाता, अगर एकमुश्त PK के पक्ष में शिफ्ट होता है तो बीजेपी के लिए यह चुनाव आसान नहीं रहेगा। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा सियासी रण बनने जा रहा है।














