पटना, 31 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन असामान्य और भावनात्मक मोड़ लेकर आया, जब विधान परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे की चर्चा करते हुए खुद को रोक नहीं पाए और भावुक हो उठे। सामान्यतः संयमित और औपचारिक दिखने वाले अध्यक्ष ने इसे “पूरे बिहार के लिए दुखद क्षण” बताया।अध्यक्ष ने बताया कि दिन की शुरुआत में ही उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई थी। इस दौरान नीतीश कुमार ने स्वयं अपने निर्णय की जानकारी दी थी।

कुछ ही घंटों बाद घटनाक्रम ने तेजी पकड़ी और उनके प्रतिनिधि संजय गांधी परिषद पहुंचे, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंप दिया। अध्यक्ष ने पुष्टि की कि इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है और सीट को रिक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही संसदीय कार्य मंत्री को भी इस संबंध में सूचित कर बुलाया गया है।अपने संबोधन में अवधेश नारायण सिंह ने नीतीश कुमार के साथ बिताए लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि नीतीश एक ऐसे नेता हैं जो अपनी भावनाओं को जाहिर नहीं करते, लेकिन हर निर्णय गहरी सोच और दूरदर्शिता से लेते हैं। “ऐसे नेता बार-बार नहीं आते, उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी,” उन्होंने कहा।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार का यह कदम उनके राज्यसभा की ओर बढ़ने का संकेत है। इसके साथ ही बिहार की सक्रिय विधायी राजनीति में उनका लंबा और प्रभावशाली अध्याय अब समाप्ति की ओर है।बिहार को ‘जंगलराज’ की छवि से बाहर निकालकर विकास की राह पर ले जाने वाले इस नेता की विदाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि एक युग का अंत है।

















