गोंडा, 09 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) अगर खेती को सही प्लानिंग और वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो यह घाटे का सौदा नहीं, बल्कि सोना उगलने वाला व्यवसाय बन सकती है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज विकासखंड के प्रगतिशील किसान अशोक कुमार मौर्य ने यह साबित कर दिखाया है। उन्होंने पारंपरिक गेहूं और धान की खेती छोड़ लहसुन की खेती अपनाई और आज बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।

लोकल 18 से बातचीत में अशोक कुमार मौर्य बताते हैं कि पहले वे गेहूं-धान की खेती करते थे, लेकिन इसमें लागत ज्यादा और आमदनी कम थी। मौसम की अनिश्चितता और बाजार में सही कीमत न मिलने के कारण उन्हें अक्सर नुकसान उठाना पड़ता था। इसी दौरान उन्होंने एक अन्य किसान को लहसुन की खेती करते देखा, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया। शुरुआत में उन्होंने सीमित जमीन पर लहसुन की खेती की, लेकिन पहले ही प्रयास में अच्छा उत्पादन और लाभ मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। वर्तमान में वे लगभग 5 बिस्वा जमीन में लहसुन उगा रहे हैं। उनका कहना है कि लहसुन की खेती में सही बीज का चयन, खेत की उचित तैयारी और जल निकासी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

ठंडा मौसम इस फसल के लिए अनुकूल माना जाता है। अशोक बताते हैं कि उन्होंने समय पर बुवाई, संतुलित सिंचाई और खाद प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। वे ज्यादातर जैविक खाद का उपयोग करते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। रासायनिक खाद का इस्तेमाल वे बहुत कम करते हैं। साथ ही, समय-समय पर निराई-गुड़ाई और रोग-कीट नियंत्रण भी करते हैं। उनके अनुसार, लहसुन की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। यही वजह है कि उन्हें अपनी उपज बेचने में कोई परेशानी नहीं होती। इस बार भी उनकी फसल काफी अच्छी है और उन्हें बेहतर आमदनी की उम्मीद है। अशोक कुमार मौर्य अब अपने गांव के अन्य किसानों को भी लहसुन की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कई किसान उनकी सलाह लेकर इस फसल को अपना चुके हैं, जिससे गांव में आय और रोजगार दोनों के अवसर बढ़ रहे हैं।
















