जयपुर, 12 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) राजस्थान में लगातार बढ़ते तापमान और लू के प्रकोप ने जनजीवन के साथ-साथ पशुधन पर भी संकट खड़ा कर दिया है। खासकर गोवंश की सुरक्षा को लेकर पशुपालकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि थोड़ी सी लापरवाही भी पशुओं की जान पर भारी पड़ सकती है। गर्मी के मौसम में सबसे बड़ी गलती जो अक्सर देखने को मिलती है, वह है दोपहर के समय पशुओं को खुले में छोड़ देना।

तेज धूप और गर्म हवाएं गोवंश के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसलिए पशुपालकों को सलाह दी गई है कि दोपहर में पशुओं को हमेशा छायादार और हवादार स्थान पर ही रखें। यदि पक्के शेड उपलब्ध नहीं हैं, तो पेड़ों की छांव या अस्थायी टाट और घास-फूस की मदद से भी ठंडा वातावरण तैयार किया जा सकता है। पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी में पशुओं को दिन में कम से कम चार बार साफ और ठंडा पानी पिलाना चाहिए। पानी की कमी से डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

इसके साथ ही संतुलित आहार और खनिज मिश्रण देना भी जरूरी है, ताकि पशु अंदर से मजबूत बने रहें। चराई के समय को लेकर भी सतर्कता जरूरी है। पशुओं को केवल सुबह जल्दी या शाम के समय ही बाहर ले जाएं, क्योंकि दिन में चराई उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।यदि किसी पशु में तेज सांस लेना, लार गिरना, कमजोरी या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत उसे ठंडे स्थान पर ले जाकर पानी का छिड़काव करें और पशु चिकित्सक से संपर्क करें। साथ ही मृत पशुओं का सुरक्षित निस्तारण भी संक्रमण रोकने के लिए बेहद आवश्यक है।














