• Home
  • कृषि
  • बैल से बिजली, गोबर से गैस: लखनऊ के किसान मॉडल ने मचाई हलचल, खेती बनी मुनाफे की मशीन
Image

बैल से बिजली, गोबर से गैस: लखनऊ के किसान मॉडल ने मचाई हलचल, खेती बनी मुनाफे की मशीन

लखनऊ, 12 अप्रैल (लखनऊ डेस्क) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पास एक ऐसा अनोखा कृषि मॉडल सामने आया है, जिसने पारंपरिक खेती की परिभाषा ही बदल दी है। पूर्व PPS अधिकारी शैलेंद्र सिंह द्वारा विकसित ‘सोलर-नंदी ऊर्जा संयंत्र’ आज किसानों के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहा है। यह मॉडल न केवल खेती की लागत को लगभग शून्य करने का दावा करता है, बल्कि अतिरिक्त आय का भी मजबूत जरिया बनकर उभरा है।

रिटायरमेंट के बाद शैलेंद्र सिंह ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संसाधनों का ऐसा संगम तैयार किया, जिसमें बैल और सोलर ऊर्जा मिलकर बिजली पैदा करते हैं। इस हाइब्रिड सिस्टम में एक विशेष पहिया लगाया गया है, जिस पर बैल के चलने से ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस ऊर्जा को 4 किलोवॉट के सोलर पैनल से जोड़ा गया है, जिससे कुल मिलाकर 10 से 30 किलोवॉट प्रति घंटा तक बिजली उत्पादन संभव है। यही बिजली खेतों की सिंचाई, आटा चक्की और कोल्हू जैसे छोटे उद्योगों को चलाने में उपयोग की जा रही है।

इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुआयामी उपयोगिता है। यह केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बायोगैस प्लांट भी शामिल है, जिससे रसोई गैस तैयार होती है। साथ ही इससे निकलने वाली स्लरी खेतों के लिए प्राकृतिक खाद का काम करती है, जिससे रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च पूरी तरह खत्म हो जाता है। करीब 4 लाख रुपये की लागत से तैयार इस सेटअप में ढाई लाख रुपये ऊर्जा संयंत्र और डेढ़ लाख रुपये बायोगैस प्लांट पर खर्च होते हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाम वर्मा के अनुसार, दो एकड़ का किसान सालाना लगभग 2.60 लाख रुपये की बचत कर सकता है। इसमें सिंचाई पर ₹25,000, खाद पर ₹30,000 और बिजली-गैस पर ₹45,000 की सीधी बचत शामिल है। इतना ही नहीं, आटा चक्की और कोल्हू चलाकर किसान सालाना ₹1.60 लाख तक की अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकता है। इस तरह महज दो साल में पूरी लागत वसूल हो जाती है और इसके बाद की आय शुद्ध मुनाफा बन जाती है। शैलेंद्र सिंह ने 250 गोवंश की गौशाला के साथ ‘मल्टीलेयर नेचुरल फार्मिंग’ को भी इस मॉडल में जोड़ा है। कोरोना काल में शुरू हुआ यह प्रयोग आज एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने अपनी ‘पावर एन्हांसर मशीन’ का पेटेंट भी कराया है। पर्यावरण के अनुकूल यह मॉडल छोटे और मध्यम किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है, जो उन्हें कर्ज के बोझ से निकालकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत आधार देता है।

Releated Posts

समस्तीपुर में हरियाली की बड़ी मुहिम शुरू, किसानों को मुफ्त मिलेंगे 16 हजार फलदार पौधे

समस्तीपुर, 25 मई (मोहम्मद जमशेद) जिले को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने के…

बिहार में कृषि स्टार्टअप्स का बड़ा धमाका: SABAGRIs में 21 नवाचारों की हुई समीक्षा, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

बक्सर, 15 मई (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर स्थित सबौर एग्री इन्क्यूबेटर्स (SABAGRIs) में कृषि स्टार्टअप्स को लेकर…

किसानों के खाते में 4.28 लाख करोड़: अब 23वीं किस्त का इंतजार, नए नियमों से बढ़ेगी पारदर्शिता

नई दिल्ली, 06 मई (अशोक “अश्क”) देश के करोड़ों किसानों के लिए बड़ी राहत और उम्मीद की खबर…

गर्मी में मक्का की सिंचाई को लेकर एक्सपर्ट की चेतावनी, जानें कौन से टिप्स से मिलेगा ज्यादा और बेहतर उत्पादन

पटना, 20 अप्रैल (पटना डेस्क) अप्रैल की तपती धूप में मक्का की फसल को उगाना अब चुनौती बन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top