बहराइच, 13 अप्रैल (विपिन श्रीवास्तव) गेहूं की कटाई खत्म होते ही किसानों और आम परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता होती है अनाज को सुरक्षित कैसे रखा जाए। कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल अगर कुछ ही महीनों में घुन और कीड़ों की भेंट चढ़ जाए, तो भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन अब बहराइच से एक ऐसा देसी तरीका सामने आया है, जो बिना किसी खर्च के सालों तक गेहूं को सुरक्षित रख सकता है।जिले के कटरा बहादुरगंज गांव के किसान अशोक मौर्य आज भी अपने पूर्वजों की पारंपरिक तकनीक अपनाकर अनाज को सुरक्षित रख रहे हैं।

उनका कहना है कि पहले के समय में जहरीले कीटनाशक नहीं होते थे, फिर भी अनाज लंबे समय तक खराब नहीं होता था। इसी अनुभव के आधार पर वे गेहूं को भूसे के ढेर में दबाकर रखते हैं।यह तकनीक बेहद सरल लेकिन असरदार है। सबसे पहले जमीन पर भूसे की मोटी परत बिछाई जाती है, फिर गेहूं से भरी बोरियों को उस पर रखकर ऊपर से फिर भूसे की परत डाल दी जाती है। इससे गेहूं के चारों ओर ऑक्सीजन का संपर्क कम हो जाता है और तापमान संतुलित रहता है, जिससे कीड़े पनप नहीं पाते।

अशोक मौर्य बताते हैं कि इस तरीके से रखा गया गेहूं न केवल खाने के लिए सुरक्षित रहता है, बल्कि अगली फसल के लिए बीज के रूप में भी उपयोगी साबित होता है। खास बात यह है कि इसमें किसी भी तरह के केमिकल या दवा की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, इस तकनीक में नमी का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। गेहूं को पूरी तरह धूप में सुखाकर ही भंडारण करना चाहिए, वरना फफूंद लगने का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, भंडारण वाली जगह सूखी और हवादार होनी चाहिए। बहराइच के किसान सालों से इस देसी नुस्खे को अपनाकर अपने अनाज को सुरक्षित रख रहे हैं, जो आज के समय में एक सस्ता और कारगर विकल्प बनकर उभर रहा है।
















