लखनऊ, 13 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) उत्तर प्रदेश के केमरी गांव के किसान नन्ने इन दिनों टमाटर की खेती से जबरदस्त मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी सफलता ने आसपास के किसानों के लिए मिसाल पेश कर दी है। नन्ने ने ‘अंसल वैरायटी’ के टमाटर की खेती अपनाई है, जिससे उन्हें लगातार बेहतर उत्पादन और शानदार आमदनी मिल रही है। किसान नन्ने बताते हैं कि वह पिछले दो वर्षों से इसी किस्म की खेती कर रहे हैं और हर बार उन्हें उम्मीद से ज्यादा फायदा हुआ है। इस बार उन्होंने करीब 5 बीघा जमीन में टमाटर लगाया, जिसमें प्रति बीघा लगभग 50 क्विंटल तक उत्पादन हुआ।

यह पैदावार पारंपरिक टमाटर खेती की तुलना में काफी अधिक मानी जा रही है।इस फसल की सबसे बड़ी खासियत इसकी जल्दी तैयार होने की क्षमता है। महज तीन महीने में फसल तैयार हो जाती है, जिसके बाद टमाटर की तुड़ाई कर उसे बाजारों में भेज दिया जाता है। नन्ने के टमाटर रामपुर से लेकर हल्द्वानी तक सप्लाई होते हैं, जहां इनकी अच्छी मांग बनी रहती है।कमाई के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। किसान के अनुसार 5 बीघा में कुल लागत करीब 50 हजार रुपये आती है, जिसमें बीज, खाद, दवाई और मजदूरी शामिल है। वहीं, अच्छी कीमत मिलने पर यही फसल करीब 2 लाख रुपये तक का मुनाफा दे देती है।

पिछले सीजन में उन्होंने टमाटर 20 से 50 रुपये प्रति किलो तक बेचा था।नन्ने ने इस खेती में ‘तार विधि’ यानी तंत तकनीक का इस्तेमाल किया है, जो आजकल किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस तकनीक में पौधों को जमीन से ऊपर तार के सहारे बढ़ाया जाता है, जिससे सड़न और फंगस की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है।किसान का दावा है कि इस विधि से 70-80 प्रतिशत तक बीमारियों का खतरा घट जाता है और टमाटर की गुणवत्ता बेहतर होती है। बरसात के मौसम में यह तकनीक और भी कारगर साबित होती है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है और किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं।

















