कोलकाता, 12 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) बंगाल में विधानसभा चुनाव की गरमाती सियासत के बीच एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर सामने आया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र और भाजपा के पूर्व नेता चंद्र कुमार बोस ने रविवार को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। कोलकाता स्थित तृणमूल भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु और सांसद कीर्ति आजाद की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

इस मौके पर बोस ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह पार्टी संविधान और नेताजी के सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि भाजपा में शामिल होना उनकी “गलती” थी, जिसे अब उन्होंने सुधार लिया है। गौरतलब है कि बोस वर्ष 2023 में ही भाजपा छोड़ चुके थे।बोस ने आरोप लगाया कि भाजपा में रहते हुए नेताजी की विचारधारा के अनुरूप काम करना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि पार्टी धर्म और विभाजन की राजनीति को बढ़ावा देती है, जो भारत की “सर्वधर्म समभाव” की परंपरा के विपरीत है।

उनके अनुसार, देश इस समय संकट के दौर से गुजर रहा है और ऐसी स्थिति में एकजुट होकर विभाजनकारी राजनीति का विरोध करना जरूरी है। भवानीपुर सीट का जिक्र करते हुए बोस ने साफ कहा कि यहां से ममता बनर्जी को हराना आसान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस सीट पर ममता बनर्जी की जीत लगभग तय है। उल्लेखनीय है कि बोस ने 2016 में भाजपा के टिकट पर भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, 2019 में उन्होंने दक्षिण कोलकाता लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा, जहां भी उन्हें सफलता नहीं मिली। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनावी माहौल में बोस का टीएमसी में शामिल होना भाजपा पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब भवानीपुर सीट पर मुकाबला हाई-प्रोफाइल बन चुका है।














