पटना, 11 अप्रैल (पटना डेस्क) गन्ने की खेती में बेहतर पैदावार के लिए सिर्फ मेहनत ही काफी नहीं, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेना भी बेहद जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि किसानों की छोटी-छोटी लापरवाहियां फसल को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती रहती हैं और जब तक इसका असर दिखता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फसल की शुरुआती अवस्था सबसे संवेदनशील होती है। इस दौरान कीटों का हमला अगर समय रहते पहचान लिया जाए, तो महंगे रसायनों के बिना भी नियंत्रण संभव है।

गन्ने में लगने वाला “शूट बोरर” कीट बेहद खतरनाक माना जाता है, जो पौधे को अंदर से खोखला कर देता है। इसके प्रमुख लक्षणों में पौधे का बीच से सूखना, नई पत्तियों का पीला पड़ना और वृद्धि रुकना शामिल है। कृषि विभाग ने सलाह दी है कि किसान नियमित रूप से खेत की निगरानी करें और संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट करें। साथ ही, जैविक उपायों को प्राथमिकता दें। इसके अलावा, कमजोर पौधों की अनदेखी भी भारी पड़ सकती है। पतले, पीले और धीमी गति से बढ़ने वाले पौधों को अलग कर उचित पोषण देना जरूरी है।

जैविक खाद और गोबर खाद के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में तीसरी बड़ी गलती के रूप में यूरिया के अत्यधिक उपयोग को बताया गया है। इससे पौधे ऊपर से हरे दिखते हैं, लेकिन अंदर से कमजोर हो जाते हैं और कीट-रोगों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने संतुलित उर्वरक और मिट्टी जांच के आधार पर खाद देने की अपील की है।
















