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काउंटिंग से पहले टीएमसी को बड़ा झटका सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत, चुनाव आयोग को मिली खुली छूट

नई दिल्ली, 02 मई (सेंट्रल डेस्क) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। वोटों की गिनती में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने किसी भी तरह का नया आदेश देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से चुनाव आयोग को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, चुनाव आयोग ने मतगणना प्रक्रिया में मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू कर्मचारियों को तैनात करने का निर्देश दिया था, जिसका टीएमसी ने विरोध किया था।

पार्टी का कहना था कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी बराबर भागीदारी दी जानी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर टीएमसी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। मामले की सुनवाई जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से आश्वासन दिया गया कि 13 अप्रैल के परिपत्र का पूरी तरह पालन किया जाएगा, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों स्तर के कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रावधान है। इसके बाद कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह काउंटिंग सुपरवाइजर और असिस्टेंट के रूप में केंद्र या राज्य दोनों में से किसी के भी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकता है।

उन्होंने कहा, “जब नियमों में यह विकल्प खुला है, तो आयोग के फैसले को गलत नहीं ठहराया जा सकता।” टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि आयोग के सर्कुलर में यह स्पष्ट नहीं है कि केवल केंद्रीय कर्मचारियों की ही तैनाती होगी, और यह कदम राज्य कर्मचारियों को बाहर रखने की मंशा दर्शाता है। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि चुनाव आयोग को नियुक्ति से जुड़े निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार है। इस फैसले के बाद अब मतगणना प्रक्रिया आयोग के निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। राजनीतिक दृष्टि से अहम इस फैसले ने बंगाल चुनाव के माहौल को और गरमा दिया है, जहां अब सभी की नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं।

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