• Home
  • राष्ट्रीय
  • ISRO में मची हलचल: वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफों से सरकार सख्त, नए आदेश के बिना नहीं मिलेगी मंजूरी
Image

ISRO में मची हलचल: वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफों से सरकार सख्त, नए आदेश के बिना नहीं मिलेगी मंजूरी

नई दिल्ली, 16 जुलाई (अशोक “अश्क”) भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अंतरिक्ष विभाग (DoS) के कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के लगातार इस्तीफों के बाद केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अब हाई-प्रोफाइल अंतरिक्ष परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के मामलों को सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूरी नहीं दी जाएगी। ऐसे सभी मामलों का अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर होगा।सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस्तीफा देकर निजी अंतरिक्ष कंपनियों का रुख किया है। इस्तीफा देने वालों में गगनयान, चंद्रयान-3, एलवीएम-3 और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े कई परियोजना निदेशक और प्रबंधक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

सरकार का मानना है कि अनुभवी वैज्ञानिकों के अचानक संस्थान छोड़ने से राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।इसी को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को एक आंतरिक ज्ञापन जारी कर निर्देश दिया है कि ग्रुप-ए के वैज्ञानिक और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या वीआरएस के अनुरोधों को अब नियमित प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किया जाएगा। संबंधित केंद्रों के निदेशकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मिशन पूरा होने तक ऐसे मामलों को स्वीकृति न दें और अपनी अनुशंसा के साथ अंतिम निर्णय के लिए मुख्यालय भेजें। हालांकि, इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने इस व्यवस्था को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निरंतरता बनाए रखना और अचानक होने वाले नुकसान से बचाव करना है।

जानकारी के अनुसार, यूआर राव सैटेलाइट सेंटर से लगभग 80 और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से कम से कम 20 वैज्ञानिकों ने पिछले वर्ष इस्तीफा दिया है। हालांकि यह संख्या इसरो के 14,600 से अधिक कर्मचारियों का छोटा हिस्सा है, फिर भी प्रमुख परियोजनाओं पर इसका प्रभाव महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में अनुभवी वैज्ञानिकों की मांग बढ़ने और बेहतर वेतन पैकेज मिलने के कारण कई विशेषज्ञ निजी कंपनियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में सरकार का नया कदम रणनीतिक परियोजनाओं में विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Releated Posts

जेनरेशन गटर से देश की ताकत तक: कंगना रनौत के बदले सुर, Gen Z पर नए बयान से फिर छिड़ी बहस

नई दिल्ली, 07 अगस्त (अशोक “अश्क”) अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयानों को…

वीर सपूतों को सलाम: फाउंडेशन स्कूल में वीरों की गाथा सुन छलक पड़े आंसू

बक्सर, 31 जुलाई (विक्रांत) कारगिल विजय दिवस पर फाउंडेशन स्कूल, बक्सर का सभागार रविवार को राष्ट्रभक्ति, वीरता और…

आधार अपडेट नहीं कराया तो अटक सकती हैं सरकारी सेवाए: बैंक, लोन और OTP तक में होगी परेशानी

नई दिल्ली, 26 जुलाई (अशोक “अश्क”) अगर आपने आधार कार्ड बनवाने के बाद वर्षों से उसमें कोई बदलाव…

वोटर बनने के नियमों में बड़ा बदलाव, चुनाव आयोग ने बदला फॉर्म-6 अब मां-बाप की जानकारी भी होगी जरूरी

नई दिल्ली, 12 जुलाई (अशोक “अश्क”) देशभर में मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की दिशा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top