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नवाज़िश

आज सेअहितयिक आंगन में उत्तर प्रदेश, अयोध्या की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ स्वदेश मल्होत्रा ‘रश्मि’ जी एक ग़ज़ल

दुनिया उजड़ गई हर एक आसरा गया

दौरे-फ़ना में जिंदगी का हौसला गया

हर ओर दिख रही है….. नफ़रत कि आग क्यों

उल्फ़त का दिलों से, किधर वो सिलसिला गया

ग़म ख़्वार कोई मिल सका न इस जहान में

हर पल दबाव ग़म का नया गुल खिला गया

ऐसी नवाजिशें मेरे मौला ने की अता

मैं जिस तरफ चली उधर रस्ता चला गया

आहें लबों पे दिल में तड़प आँख में आंसू

फ़ुरकत कि सनम देकर कैसी सज़ा गया

बेकार ख्वाहिशों का बोझ…ढो रहे थे हम

आया समझ में तो हर एक ग़म चला गया

आशा उमीद की न रश्मि दिख रही कहीं

जुल्मत का अंधेरा दिशाओं में समा गया

~ डॉ स्वदेश मल्होत्रा ‘रश्मि’

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