नई दिल्ली, 14 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) उत्तर प्रदेश के नोएडा में मजदूरों के उग्र प्रदर्शन ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। लगातार पांचवें दिन जारी विरोध के बीच राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “देश के श्रमिकों की आखिरी चीख” करार दिया। उन्होंने कहा कि मजदूर बार-बार अपनी मांगें रखते-रखते थक चुके हैं, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हालात तनावपूर्ण हो गए, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।

बढ़ते दबाव के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी श्रेणियों के मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा। मेधा रूपम ने बताया कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिश पर यह वृद्धि की गई है, जिसे मुख्यमंत्री की मंजूरी मिल चुकी है। नई दरों के अनुसार गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। वहीं अर्धकुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये मिलेंगे।

अन्य नगर निगम क्षेत्रों और जिलों में भी मजदूरी दरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। यह निर्णय नियोक्ता और श्रमिक संगठनों के साथ बातचीत के बाद लिया गया, ताकि औद्योगिक असंतोष को शांत किया जा सके। सोमवार को हजारों मजदूर सड़कों पर उतरे थे और बेहतर वेतन व कामकाजी परिस्थितियों की मांग कर रहे थे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके बाद सरकार ने स्थिति संभालने के लिए एक समिति का गठन किया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक मजदूर की 12 हजार की तनख्वाह में से 4 से 7 हजार रुपये किराए में चले जाते हैं, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। उन्होंने वैश्विक कारणों जैसे पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई चेन संकट का हवाला देते हुए कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब मजदूरों पर पड़ा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए लेबर कोड लागू कर काम के घंटे बढ़ा दिए गए हैं। फिलहाल मजदूरी बढ़ोतरी के बावजूद, मजदूरों की नाराजगी पूरी तरह शांत होती नहीं दिख रही है।














