पटना, 13 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की सियासत में बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय जनता दल की छात्र इकाई अब अपने पुराने स्वरूप में नहीं रहेगी। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पहचान रही ‘छात्र राजद’ को अब नया नाम दिया जा रहा है। उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव इसे खत्म कर “स्टूडेंट विंग ऑफ आरजेडी” के रूप में पुनर्गठित करने जा रहे हैं। इस फैसले के पीछे बड़ी रणनीति मानी जा रही है। दरअसल, छात्र राजद पर लंबे समय तक तेजप्रताप यादव का प्रभाव रहा।

वर्ष 2011 से 2025 तक संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ थी, जिससे पार्टी के अंदर टकराव की स्थिति भी बनी। अब तेजस्वी यादव संगठन को पुराने प्रभाव से मुक्त कर नई टीम और नई पहचान देना चाहते हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, नाम बदलने से संगठन को नई छवि और विस्तार का मौका मिलेगा। अगर पुराने नाम से कोई नकारात्मक धारणा जुड़ी है, तो उसे भी खत्म किया जा सकता है। हालांकि, इससे कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम और नए नाम के प्रचार में अतिरिक्त खर्च जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। पार्टी का तर्क है कि अन्य दलों की तरह छात्र संगठन को भी स्वतंत्र पहचान दी जाए।

जैसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन विश्वविद्यालयों में सक्रिय हैं, उसी तर्ज पर नया संगठन भी मजबूत होगा। इस बदलाव के पीछे एक और बड़ी रणनीति ‘माई समीकरण’ से आगे बढ़ने की है। राजद अब अन्य वर्गों और युवाओं को जोड़ने की कोशिश में है। छात्र राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवल किशोर यादव के अनुसार, लिंगदोह कमेटी के नियमों के कारण भी यह बदलाव जरूरी था।अब देखना होगा कि यह नया दांव राजद को कितना राजनीतिक फायदा दिलाता है।














