समस्तीपुर, 12 अप्रैल (हर्षिता “अश्क”) जिले से होकर गुजरने वाली बहुप्रतीक्षित पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना ने अब रफ्तार पकड़ ली है। केंद्र सरकार से वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परियोजना का गजट प्रकाशित हो चुका है और इसके साथ ही दावा-आपत्ति का दौर भी शुरू हो गया है। अब तक 400 से अधिक लोगों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जिनके निस्तारण में जिला प्रशासन सक्रिय रूप से जुटा हुआ है।

यह एक्सप्रेस-वे पीपीपीएसी के तहत हैम मॉडल पर बनाया जाएगा, जिसमें 40 प्रतिशत लागत सरकार वहन करेगी, जबकि 60 प्रतिशत राशि निर्माण एजेंसी लगाएगी। एजेंसी टोल के जरिए अपनी लागत की वसूली करेगी। जिले के भीतर इस परियोजना को दो पैकेज में पूरा किया जाएगा। पहला पैकेज वैशाली के मीरनगर अरेजी से रोसड़ा के भिरहा तक 84.500 किलोमीटर लंबा होगा, जिस पर 10083.96 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं दूसरा पैकेज भिरहा से सरौंजा तक 51.835 किलोमीटर लंबा होगा, जिसकी लागत 8564.82 करोड़ रुपये आंकी गई है।

बिहार का यह पहला एक्सप्रेस-वे होगा जो पूरी तरह राज्य की सीमा के भीतर बनेगा। चार लेन के इस अत्याधुनिक मार्ग के लिए छह लेन के हिसाब से जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में विस्तार संभव हो सके। कुल 2236.003 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी, जिसमें वन, सरकारी और निजी जमीन शामिल है।एक्सप्रेस-वे का प्रवेश मोरवा के लडूआ से होगा और यह सरायरंजन, उजियारपुर, विभूतिपुर, खानपुर होते हुए रोसड़ा और आगे सहरसा की ओर जाएगा। इसके निर्माण से जिले की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। पटना से पूर्णिया की दूरी महज तीन घंटे में तय हो सकेगी, जिससे सीमांचल क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।इस परियोजना से व्यापार, कृषि और उद्योग को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। किसानों की उपज बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचेगी, वहीं सड़क किनारे नए व्यवसाय, पेट्रोल पंप और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेस-वे जिले की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित होगा।















