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संसद परिसर में मोदी-राहुल की मुलाकात ने मचाया सियासी हलचल

नई दिल्ली, 11 अप्रैल (अशोक “अश्क”) शनिवार को संसद परिसर में ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच लंबी और गंभीर बातचीत हुई। प्रधानमंत्री अपनी कार से उतरकर प्रेरणा स्थल की ओर जा रहे थे तभी उन्होंने राहुल गांधी को देखा और कुछ देर रुककर उनके साथ पूरी तल्लीनता से चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत पूरी तरह सौहार्दपूर्ण नजर आई और तस्वीरों में वे एक दूसरे के बेहद करीब खड़े होकर गंभीरता से बात करते दिखाई दिए।

यह दृश्य भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही तीखी राजनीतिक बहसों से बिल्कुल अलग माना जा रहा है और इसे एक दुर्लभ अनौपचारिक संवाद के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरान आसपास मौजूद लोग भी कुछ पल के लिए रुक गए और यह नजारा संसद परिसर में चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर इस मुलाकात का वीडियो तेजी से वायरल हो गया और कई यूजर्स ने इसे लोकतांत्रिक संवाद का सकारात्मक उदाहरण बताया। एक एक्स यूजर ने लिखा कि प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के बीच हुई यह बातचीत देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करती है।

प्रधानमंत्री इस अवसर पर प्रेरणा स्थल पर महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश समेत कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न दलों के नेता एक साथ आकर फुले की विरासत को नमन करते नजर आए और सामाजिक न्याय पर चर्चा करते दिखे। समारोह के दौरान संसद परिसर में विभिन्न दलों के बीच यह सौहार्दपूर्ण माहौल विशेष रूप से चर्चा का विषय बना रहा और इसे राजनीतिक तनाव के बीच एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा गया और इसे लोकतंत्र की परंपरा और संवाद की शक्ति के रूप में भी सराहा गया। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की मुलाकातें राजनीतिक वातावरण को सकारात्मक दिशा देती हैं और जनता में भरोसा बढ़ाने का काम करती हैं, ऐसे क्षण संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक संवाद की मजबूती को दर्शाते हैं और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं को भी उजागर करते हैं। इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण दृश्य माना जा रहा है जो लंबे समय तक याद रहेगा।

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