पटना, 11 अप्रैल (अविनाश कुमार) रसोई गैस की किल्लत ने अब आम लोगों की दिनचर्या ही बदल दी है। शहर में तेजी से लोग गैस सिलेंडर छोड़कर बिजली से चलने वाले चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बिजली की मांग अचानक बढ़ गई है। हालात को भांपते हुए बिजली विभाग ने आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है, ताकि करीब 1.28 लाख उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिल सके।

पटना के गुलजारबाग और पटना सिटी प्रमंडलों में नई बिजली व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके तहत महेंद्रू स्थित एससीईआरटी परिसर और रानीपुर में नए पावर सब-स्टेशन बनाए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ये दोनों उपकेंद्र अगले तीन महीनों में तैयार हो जाएंगे, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। पटना सिटी प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता शिव शंकर प्रसाद के अनुसार, यहां 63 हजार उपभोक्ताओं को पांच उपकेंद्रों और 400 ट्रांसफार्मरों के जरिए बिजली मिल रही है।

लोड बढ़ने के कारण 200 केवी के 18 ट्रांसफार्मरों को हटाकर 315 केवी के अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं। अब तक आठ स्थापित हो चुके हैं, जबकि बाकी पर काम जारी है। वहीं गुलजारबाग प्रमंडल में कार्यपालक अभियंता सज्जाद अंसारी ने बताया कि यहां सात उपकेंद्रों के जरिए 65 हजार उपभोक्ताओं को बिजली दी जा रही है। 35 स्थानों पर ट्रांसफार्मर अपग्रेड का काम चल रहा है, जिनमें से 15 पूरे हो चुके हैं। हालांकि, जमीन की कमी और पोल लगाने में स्थानीय सहयोग की जरूरत बड़ी चुनौती बनी हुई है। विभाग का कहना है कि यदि लोगों का सहयोग मिला, तो बिजली आपूर्ति और अधिक सुदृढ़ होगी। स्पष्ट है कि गैस संकट ने अब बिजली व्यवस्था की परीक्षा ले ली है और इस ‘एनर्जी शिफ्ट’ का असर आने वाले दिनों में और गहराने की आशंका है।













