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मुंगेर के तालाबों से दार्जिलिंग तक पहुंचा झींगा: 800 रुपये किलो बिक रही उपज, 120 दिन में किसानों की चमकी किस्मत

मुंगेर, 28 अक्टूबर (प्रभात यादव) आदिवासी बहुल धरहरा प्रखंड के किसानों ने अपनी मेहनत और सरकारी सहयोग से नीली क्रांति की नई इबारत लिख दी है। यहां के तालाबों में वैज्ञानिक पद्धति से तैयार झींगा मछली अब भागलपुर से लेकर पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल दार्जिलिंग की थोक मंडियों तक पहुंच रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित झींगा को दार्जिलिंग में 800 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिलने से किसानों का उत्साह बढ़ गया है। महज 120 दिनों में तैयार होने वाली इस मछली ने किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता खोल दिया है। मुंगेर में पहली बार शुरू हुआ व्यावसायिक उत्पादनअब तक क्षेत्र के लोगों को झींगा मछली के लिए नदियों या बंगाल से आने वाली मछलियों पर निर्भर रहना पड़ता था।

लेकिन अब मुंगेर के तालाबों में तैयार ताजी झींगा मछली बाजारों में अपनी पहचान बना रही है। मत्स्य विभाग, मुंगेर के सहयोग से धरहरा प्रखंड के दो किसानों ने मार्च 2026 में आधा एकड़ के तालाब में इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया। जिले में पहली बार इस तरह की पहल की गई। धरहरा के किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए मत्स्य विभाग ने 8,000 झींगा लार्वा, उच्च गुणवत्ता वाला दाना और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराईं। साथ ही उत्पादन की पूरी प्रक्रिया में तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। विभागीय अधिकारियों की देखरेख में चार महीने के भीतर झींगा का वजन 40 से 45 ग्राम तक पहुंच गया।भागलपुर में 600, दार्जिलिंग में 800 रुपये किलो भावभलार गांव के किसान अशोक कुमार और महरना की उषा देवी ने बताया कि पहली खेप भागलपुर की थोक मंडी में 600 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची गई।

इसके बाद दार्जिलिंग में 800 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिला। बेहतर कीमत मिलने के कारण किसान अब वहां अपनी उपज भेजने को प्राथमिकता दे रहे हैं। दोनों किसान अब तक दो खेपों में कुल 300 किलोग्राम झींगा बेच चुके हैं। इस सफलता से धरहरा के अन्य किसानों के बीच भी झींगा पालन को लेकर उम्मीद जगी है।

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