नई दिल्ली, 06 मई (अशोक “अश्क”) देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में इस महीने के अंत में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। बैंक कर्मचारियों के संगठन ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन ने 25 और 26 मई 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि इन तिथियों के आसपास अवकाश रहा, तो हड़ताल 27 मई तक भी बढ़ सकती है। यह हड़ताल मुख्य रूप से वर्कमेन कैटेगरी के कर्मचारियों द्वारा 16 सूत्रीय मांगों को लेकर की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं पर प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा, जिससे अब आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। सबसे बड़ा मुद्दा नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़ा है।

कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें अपने फंड मैनेजर चुनने की स्वतंत्रता दी जाए, जैसा अन्य सरकारी बैंकों में मिलता है। इसके अलावा सातवें द्विपक्षीय समझौते के तहत रिटायर कर्मचारियों की पेंशन में सभी वेतन घटकों को शामिल करने की मांग भी प्रमुख है।फेडरेशन ने भर्ती और आउटसोर्सिंग को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि पिछले तीन दशकों से मैसेंजर और सशस्त्र गार्ड जैसे पदों पर भर्ती नहीं की गई, जिससे सुरक्षा और रोजगार दोनों प्रभावित हुए हैं। सूरत शाखा में हालिया डकैती का उदाहरण देते हुए कर्मचारियों ने इसे बड़ी लापरवाही बताया है।वेतन विसंगति भी हड़ताल की बड़ी वजह बन गई है। 12वें द्विपक्षीय समझौते के बाद अधिकारियों को जहां करीब 22 प्रतिशत तक लाभ मिला, वहीं वर्कमेन कैटेगरी के कर्मचारियों को केवल 17 प्रतिशत तक ही सीमित रखा गया।

कर्मचारी इसे भेदभाव बताते हुए ‘पैरिटी’ की मांग कर रहे हैं। हड़ताल से पहले संगठन ने देशभर में विरोध कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। इसमें सोशल मीडिया अभियान, मौन धरना, लंच टाइम प्रदर्शन और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन सौंपना शामिल है। यदि हड़ताल सफल रही, तो देशभर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे आम ग्राहकों को लेन-देन, चेक क्लीयरेंस और अन्य जरूरी सेवाओं में परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
















