नई दिल्ली, 04 मई (सेंट्रल डेस्क) भारत में सोना सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि भरोसे और सुरक्षा का प्रतीक रहा है। इसी विश्वास ने देश में गोल्ड फाइनेंस कारोबार को आसमान तक पहुंचा दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000 टन सोना मौजूद है, जो कई देशों के गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा है। लेकिन इस विशाल भंडार का एक चौंकाने वाला हिस्सा अब निजी कंपनियों के पास गिरवी रखा जा चुका है।सबसे बड़ा नाम है मुथूट फाइनेंस लिमिटेड, जिसके पास अकेले करीब 205 टन सोना गिरवी के रूप में जमा है। इस गोल्ड की कीमत लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। दिलचस्प बात यह है कि यह मात्रा पाकिस्तान के कुल स्वर्ण भंडार से करीब तीन गुना ज्यादा बताई जा रही है, जिसने वित्तीय जगत में हलचल मचा दी है।

करीब 139 साल पुरानी यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी गोल्ड फाइनेंस कंपनी मानी जाती है। इसकी शुरुआत 1887 में केरल के कोझेनचेरी गांव से हुई थी। आज यह देशभर में फैले अपने नेटवर्क के जरिए लाखों ग्राहकों को गोल्ड लोन की सुविधा दे रही है। फरवरी 2026 में निवेशकों को दी गई प्रस्तुति के अनुसार कंपनी का गोल्ड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 1,64,720 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।देशभर में मुथूट फाइनेंस की 4950 से अधिक शाखाएं संचालित हैं, जहां हर शाखा के पास औसतन 28 करोड़ रुपये का गोल्ड AUM है। कंपनी 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है और हर साल लाखों लोग अपने सोने के बदले लोन लेने के लिए इस पर भरोसा करते हैं। कंपनी की कमान वर्तमान में जॉर्ज जैकब मुथूट और जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट के हाथों में है।

परिवार की तीसरी पीढ़ी ने इस कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 1997 में प्राइवेट लिमिटेड बनने के बाद 2011 में कंपनी ने आईपीओ के जरिए शेयर बाजार में एंट्री की।आज मुथूट फाइनेंस सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि यूके और श्रीलंका जैसे देशों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। रोजाना करीब 2 लाख ग्राहकों को सेवाएं देने वाली यह कंपनी भारतीयों के ‘सोने के भरोसे’ को एक विशाल आर्थिक ताकत में बदल चुकी है।
















