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महिलाओं के स्वरोजगार को मिलेगा वित्तीय सहारा: पहली किस्त में ₹10 हजार, प्रशिक्षण के बाद खाते में आएंगे ₹20 हजार और

पटना, 14 जुलाई (पटना डेस्क) महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने के उद्देश्य से सोमवार को जिला परियोजना समन्वय इकाई में एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में परियोजना कर्मियों को ग्राम संगठन स्तर पर वित्तीय साक्षरता एवं लेखांकन प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षित किया गया, ताकि योजना से जुड़ी प्रत्येक महिला लाभार्थी अपने स्वरोजगार को सफलतापूर्वक संचालित कर सके। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के नोडल अधिकारी अनुपम जान एवं कुंदन लाल साह ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) के माध्यम से किया। प्रशिक्षण के दौरान परियोजना कर्मियों को वित्तीय प्रबंधन, लेखांकन और व्यवसाय संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

साथ ही यह बताया गया कि ग्राम संगठनों तक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना प्राथमिक लक्ष्य है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परियोजना प्रबंधक आचार्य मम्मट ने कहा कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब हर पात्र महिला तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पहुंचे। उन्होंने कहा कि वित्तीय साक्षरता और लेखांकन किसी भी छोटे या बड़े व्यवसाय की सफलता की मजबूत नींव हैं। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजना से जुड़ी कोई भी पात्र महिला इस प्रशिक्षण से वंचित न रहे। इस अवसर पर योजना के नोडल अनुपम जान ने बताया कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पात्र महिला लाभार्थियों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

इसके बाद स्वरोजगार गतिविधियों का सत्यापन और निर्धारित मानकों के मूल्यांकन के उपरांत पात्र महिलाओं को दूसरी किस्त के रूप में 20 हजार रुपये सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से उनके बैंक खाते में भेजे जाएंगे।उन्होंने बताया कि दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को वित्तीय साक्षरता एवं लेखांकन प्रशिक्षण पूरा करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह की बैठकों में नियमित भागीदारी भी आवश्यक होगी। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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