पटना, 31 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने अनंत सिंह को एक दिसंबर तक संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है।सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नवनिर्वाचित जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे अनंत सिंह का निजी मामला बताया। उन्होंने कहा कि अनंत सिंह को खुद इससे निपटना है। यह उनका अपना मामला है और वह ऐसे लोगों पर कोई ध्यान नहीं देते। मोकामा टाल इलाके में 30 अक्टूबर 2025 को विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी।

उस समय दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी का समर्थन कर रहे थे। इसी दौरान उनके समर्थकों और अनंत सिंह के काफिले के बीच टकराव हुआ था। घोसवरी थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, अनंत सिंह और उनके सहयोगियों पर दुलारचंद यादव को गाड़ी से बाहर खींचने, पैर में गोली मारने, मारपीट करने और एसयूवी से कुचलने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, अनंत सिंह ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया था। उनका दावा था कि जन सुराज समर्थकों ने पहले उनके काफिले पर हमला किया था।पुलिस ने एक नवंबर 2025 को अनंत सिंह को गिरफ्तार कर बेऊर सेंट्रल जेल भेज दिया था। जेल में रहते हुए उन्होंने जदयू के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीत लिया। इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को उन्हें जमानत दे दी थी।

इस आदेश को मृतक दुलारचंद यादव के पोते और जदयू नेता नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाल ही में जदयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह के समर्थन में प्रचार किया था। इसके बाद बिहार सरकार ने नीलम देवी से राज्यस्तरीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति का पद और राज्य मंत्री का दर्जा वापस ले लिया। भवन निर्माण विभाग ने 26 अक्टूबर 2026 को पटना के एक मॉल रोड स्थित सरकारी बंगले को खाली करने का नोटिस भी जारी किया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अनंत सिंह की कानूनी और राजनीतिक मुश्किलों को और गहरा कर दिया है।















