नई दिल्ली,, 06 मई (अशोक “अश्क”) केप वर्डे के पास समुद्र में फंसे क्रूज शिप एमवी होंडियस पर खतरनाक संक्रमण का साया गहराता जा रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार जहाज पर अब तक हंता वायरस के दो मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि पांच अन्य संदिग्ध हैं। कुल सात मामलों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, एक मरीज की हालत गंभीर बनी हुई है और तीन में हल्के लक्षण पाए गए हैं। करीब 150 यात्रियों और क्रू मेंबर को लेकर चल रहा यह जहाज कई दिनों से समुद्र में ही रुका हुआ है। केप वर्डे प्रशासन ने संक्रमण के खतरे को देखते हुए जहाज को किनारे लगाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सभी यात्रियों को अपने-अपने केबिन में ही रहने का निर्देश दिया गया है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके। विशेषज्ञों के मुताबिक हंता वायरस एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक संक्रमण है, जो आमतौर पर संक्रमित चूहों के संपर्क से फैलता है। चूहों के मल, पेशाब या लार के जरिए यह वायरस इंसानों तक पहुंचता है। हालांकि कुछ मामलों में सीमित स्तर पर मानव-से-मानव संक्रमण की भी आशंका जताई गई है, खासकर जब संक्रमित व्यक्ति के साथ लंबे समय तक नजदीकी संपर्क हो। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान।

लेकिन स्थिति बिगड़ने पर यह फेफड़ों और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और जान का खतरा बढ़ जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि हंता वायरस के लिए अभी तक कोई प्रभावी टीका या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट या वेंटिलेटर पर रखना पड़ सकता है। ऐसे में रोकथाम ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि चूहों से दूरी बनाए रखें, आसपास साफ-सफाई रखें और संक्रमित क्षेत्रों में सावधानी बरतें। साथ ही, संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उन्हें तुरंत अलग करना और इलाज देना बेहद जरूरी है। समुद्र के बीच फंसे इस ‘मौत के जहाज’ ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, वहीं यात्रियों और उनके परिजनों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है।

















